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Rajasthan RTE: आगाज से पहले विवाद शुरू…​निजी स्कूलों ने खोला मोर्चा, मांगें नहीं मानीं तो एडमिशन नहीं

RTE 2025 Admission Update: राजस्थान में 20 फरवरी से शुरू होने जा रही आरटीई प्रवेश प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ

प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ

RTE 2025 Admission Update: राजस्थान में 20 फरवरी से शुरू होने जा रही आरटीई प्रवेश प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में घिर गई है। एक ओर हजारों अभिभावक पिछले सत्र के लंबित दाखिलों को लेकर परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों ने नई प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

निजी स्कूल प्रबंधन ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने तक आरटीई के तहत नए प्रवेश नहीं दिए जाएंगे। इधर, अभिभावक संगठनों का दावा है कि सत्र 2025-26 में चयनित करीब 44 हजार बच्चों को अब तक निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल पाया। कई अभिभावक महीनों से शिक्षा विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

उनका आरोप है कि चयन के बावजूद स्कूल प्रवेश देने से बच रहे हैं और विभाग की नोटिस की कार्रवाई बेअसर साबित हुई है। 30 से अधिक स्कूलों को नोटिस दिए गए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब उन्हीं स्कूलों में दोबारा लॉटरी की तैयारी ने अभिभावकों की चिंता और बढ़ा दी है।

पुनर्भरण राशि और प्रवेश की कक्षाओं पर विवाद

निजी विद्यालय संगठनों का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 और हाईकोर्ट के आदेशों की सही व्याख्या नहीं की जा रही। उनका कहना है कि प्रवेश केवल एंट्री लेवल कक्षा में ही होना चाहिए, जबकि हालिया दिशा-निर्देशों में चार कक्षाओं में प्रवेश का प्रावधान दर्शाया गया है। पुनर्भरण की समय-सीमा तय नहीं है।

स्कूलों का आरोप है कि प्रति छात्र करीब 13 हजार रुपए की तय राशि वर्षों से समय पर नहीं मिलती, जबकि सरकारी स्कूलों पर प्रति छात्र खर्च कहीं अधिक है। बकाया भुगतान करोड़ों में बताया जा रहा है। निजी स्कूलों ने मांग रखी है कि हाईकोर्ट के आदेशों की स्पष्टता जारी की जाए। भुगतान की पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था अधिसूचित हो तथा लंबित बकाया तुरंत चुकाया जाए। अन्यथा वे आरटीई के तहत प्रवेश देने में असमर्थ रहेंगे।

बच्चों के भविष्य पर सवाल

हर साल की तरह इस बार भी आरटीई प्रक्रिया की शुरुआत से पहले खड़ा हुआ यह टकराव बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि सरकार और स्कूल प्रबंधन के बीच जल्द समाधान नहीं निकला तो हजारों जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई फिर अधर में लटक सकती है।