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राजस्थान के वैज्ञानिकों का कमाल, तूफान आए या बारिश खेत में अटल खड़ी रहेगी फसल

जयपुर में तैयार की गई दो नई किस्मों से जल्द ही देशभर के कई राज्यों में अच्छी गुणवत्ता वाले जौ की खेती हो सकेगी।

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Barley

आशीष शर्मा/ जयपुर। जयपुर में तैयार की गई दो नई किस्मों से जल्द ही देशभर के कई राज्यों में अच्छी गुणवत्ता वाले जौ की खेती हो सकेगी। दुर्गापुरा स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिकों की ओर से कई सालों की मेहनत के बाद तैयार की गई इन किस्मों में खासतौर पर पीली रोली का रोग नहीं लगेगा। इन किस्मों से न केवल जौ का अधिक और शीघ्र उत्पादन हो सकेगा बल्कि फसल की उंचाई सामान्य रूप से कम होने से जौ की लहलहाती फसल को सामन्यतया हवा और बारिश भी आड़ा नहीं गिरा सकेंगी। कृषि वैज्ञानिकों ने देश के उत्तरी पूर्वी, उत्तरी पश्चिमी मैदानी लवणता वाले स्थानों के साथ ही मध्य भारत के राज्यों के इन नई किस्मों को ईजाद किया है।

राजस्थान कृषि अनुसंधान केन्द्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ अजय सिंह शेखावत ने बताया कि वाराणसी में हुई कृषि वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण बैठक में समय वाली और सिंचित बुवाई के लिए जौ की किस्म आरडी 2907 और आरडी 2899 को उत्पादन के लिए चिन्हिृत किया गया है। कृषि मंत्रालय की हरी झंडी के बाद ये किस्म उपज के लिए उपलब्ध हो सकेंगी। आरडी 2907 किस्म खासतौर पर देश के उत्तरी पूर्वी और उत्तरी पश्चिमी मैदानी राज्यों के लवणीय क्षेत्रों के लिए तैयार की गई है। इस किस्म की खास बात यह होगी कि इसे राजस्थान के जोधपुर, भीलवाड़ा, जालौर, पाली, बीकानेर, नागौर, चूरू, अजमेर, जयपुर समेत अन्य जिले और पंजाब, हरियाणा, यूपी समेत अन्य राज्यों के लवणीय क्षेत्रों में जौ का अधिक उत्पादन किया जा सकेगा। जबकि आरडी 2899 के जरिए मध्य भारत के गुजरात, एमपी, छत्तीसगढ के साथ ही दक्षिणी राजस्थान व अन्य क्षेत्रों में जौ का अधिक उत्पादन किया जा सकेगा।

नई किस्म की यह खासियत
कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रदीप सिंह शेखावत ने बताया कि आरडी 2907 फसल की हाईट कम होने से सामान्य बारिश और हवा के चलते जौ की फसल के आड़ा गिरने की समस्या भी नई किस्म में नहीं होगी। प्रति हेक्टेयर में होने वाला जौ का उत्पादन 30 क्विंटल से बढ़कर 36 क्विंटल तक हो सकेगा। जबकि आरडी 2899 किस्म की खास बात यह है कि यह 115 दिन में ही पक जाती है। साथ ही इसमें अच्छी संख्या में कल्ले फूटने से उत्पादन अधिक होता है। दोनों ही किस्म पीली रोली रोग से ग्रसित नहीं होंगी। इन किस्मों को तैयार करने में अनुसंधान के कृषि वैज्ञानिक डॉ सुदेश कुमार, डॉ एस एस राजपूत, डॉ एस पी विश्नोई, डॉ ए एस बलोदा के सहयोग के साथ ही श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विवि के कुलपति डॉ प्रवीण सिंह राठौड़ का मार्गदर्शन रहा है।