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राजस्थान में शिक्षा और स्वास्थ्य से ज्यादा परिवहन पर हो रहा खर्च, 10 राज्यों से आगे निकले हम

Rajasthan News: रोटी, कपड़ा और मकान ही अब लोगों की जरूरत नहीं है, इसमें परिवहन भी बड़े खर्च भी रूप उभरकर आया है।

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जयपुर। रोटी, कपड़ा और मकान ही अब लोगों की जरूरत नहीं है, इसमें परिवहन भी बड़े खर्च भी रूप उभरकर आया है। पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि देश में शिक्षा, चिकित्सा और खाने से अधिक खर्च परिवहन पर किया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में परिवहन पर प्रति व्यक्ति औसत खर्च 313 जबकि शहरी क्षेत्र में यह 592 रुपए प्रति व्यक्ति है। यानी शहरी क्षेत्रों में परिवारों का 8.46 फीसदी खर्च परिवहन पर हो रहा है, वहीं 7.59 फीसदी खर्च ग्रामीण परिवार कर रहे हैं।

राजस्थान की बात करें तो यहां परिवारों का परिवहन पर होने वाला खर्च राष्ट्रीय औसत से अधिक है। यानी प्रदेश में औसत मासिक खर्च 10 राज्यों से अधिक है। राजस्थान के शहरी क्षेत्रों में जहां 9.91 फीसदी खर्च परिवहन पर हो रहा है, वहीं, राष्ट्रीय औसत खर्च 8.46 फीसदी है।

शहरीकरण, आवागमन बढ़ा

राजस्थान में परिवहन खर्च बढ़ने का प्रमुख कारण यह भी है कि राजधानी जयपुर सहित कई बड़े शहरों का विस्तार हो रहा है। जयपुर में 50 किलोमीटर एरिया तक बसावट हो चुकी है। ऐसे में लोग दफ्तर आने-जाने या घरों से निकलने में निजी वाहनों का उपयोग करते हैं। जिससे लोगों का परिवहन खर्च बढ़ रहा है।

ऐसे बढ़ गया हमारा परिवहन खर्च

सार्वजनिक परिवहन की कमी: शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन के साधनों की कमी के कारण परिवहन का खर्च बढ़ रहा है। एक दशक में भी सरकारों ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साधनों को नहीं बढ़ाया है। कमी के कारण लोग अपने निजी वाहनोें का उपयोग करते हैं। इससे परिवहन खर्च में बढ़ोतरी हो रही है। जयपुर शहर के कई इलाकों में तो सार्वजनिक परिवहन की सुविधा शून्य है।

सबके पास अपने-अपने वाहन: शहर का विस्तार होने के कारण घरों में वाहन बढ़ गए हैं। एक घर में अगर चार लोग हैं तो सभी के पास अपने अलग वाहन हैं। अमूमन घर में दो कार और बाइक देखने को मिल रही है। ऐसे में घर के सभी लोग आने-जाने में अपने-अपने वाहनोें का उपयोग करते हैं। इससे परिवहन का खर्च भी बढ़ रहा है।

रेल कनेक्टिविटी सही नहीं: राज्य के कई शहरों में रेल की सही कनेक्टिविटी नहीं है। जहां कनेक्टिविटी है वहां ट्रेन अधिक समय लेती हैं। ऐसे में लोग एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए निजी वाहनों का ही उपयोग करते हैं। इससे परिवहन का खर्च बढ़ रहा है।

शहरोें में 15 हजार रुपए मासिक खर्च: जयपुर जैसे बड़े शहरों में एक लाख आमदनी वाले घर में दो लोग वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। उनके घर में परिवहन पर औसत खर्च 15 हजार रुपए मासिक हो रहा है। यह खर्च उनके मासिक शिक्षा, चिकित्सा और खाने से अधिक है।

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छोटे शहरों में 5 से 8 हजार: ऐसे शहर करीब 15 से 20 किलोमीटर एरिया तक फैले हैं। यहां लोगों का आना-जाना रोज पांच से 10 किमी तक होता है। घर में अमूमन एक ही वाहन होता है। इन शहरों के घरों में परिवहन पर औसत खर्च पांच से आठ हजार रुपए मासिक है।

गांवों में परिवहन पर खर्च: पांच किलोमीटर तक दायरे में बसे गांवों में लोग पैदल ही आ-जाते हैं। गांव के पास-पास या गांव में लोग वाहनोें का इस्तेमाल करते हैं। इनका औसत खर्च 500 से 1500 रुपए मासिक है।

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