
राजस्थान राज्य महिला आयोग। फोटो पत्रिका
Rajasthan Women : प्रदेश में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, घरेलू और यौन हिंसा, ऑनर किलिंग की घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। इसके बीच बीच महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की निगरानी के लिए बना राजस्थान राज्य महिला आयोग खुद ही लापता है। हाल ही राजधानी में हुई छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पर लगातार सवाल उठ रहे है। पत्रिका रिपोर्टर ने एक सप्ताह तक आयोग के दफ्तर का जायजा लिया तो पता चला कि कभी पीड़ित महिलाओं की आवाज बनने वाला आयोग का दफ्तर अब सूना पड़ा है।
आयोग पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलवाने की जगह अब केवल डाकघर बन चुका है। यहां अपनी व्यथा सुनाने और समाधान की उम्मीद लेकर पहुंच रही पीड़ित महिलाओं को कर्मचारियों से एक ही जवाब मिल रहा है.. आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष आएं तब ही आना.. तब तक कुछ नहीं होगा।
केस-1
कोई अधिकारी नहीं मिलता
जयपुर जिले की महिला ने बताया कि उसे कभी यहां कोई अधिकारी नहीं मिलता। वहां एक कर्मचारी ने उसे कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष आएंगी तब आना। अभी यहां कोई सुनने वाला नहीं है। वह घरेलू हिंसा से परेशान है। कई बार आयोग के चक्कर लगा चुकी है। ससुराल पक्ष वाले लगातार परेशान कर रहे हैं।
केस-2
कार्रवाई के बजाए चिट्ठी भेज दी
यौन शोषण पीड़िता ने आयोग के दफ्तर में रिपोर्टर को बताया कि उसने एफआइआर दर्ज करवाई। लेकिन एक महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। आयोग ने उसका केस तो दर्ज किया, लेकिन सुनवाई के बजाय उसकी शिकायत की चिट्टी बनाकर महिला हेल्पलाइन और महिला संगठनों को भेज दी। मजबूरन उसने अपना केस ही बंद कर दिया।
अधिकारियों को पत्र लिखने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। फिलहाल आयोग की स्थिति नाम की रह गई है, जहां पर्यापत स्टॉफ भी नहीं है और पीड़िताओं की सुनवाई प्रभावी ढंग से नहीं हो रही है। आयोग केवल डाक के जरिए केस भेज देता है। फिर हम पीड़िता से संपर्क करते हैं। रेणुका पामेचा, सामाजिक कार्यकर्ता
हम महिलाओं से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई और कार्रवाई करते हैं। हमारे पास आने वाले हर मामले की पूरी सुनवाई, जांच और प्रक्रिया हम स्वयं पूरा करते हैं। आज तक जितने भी मामले आए, उनमें कार्रवाई की गई है।
दीप्ती जोशी, सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य महिला आयोग
फरवरी 2025 में रेहाना रियाज चिश्ती का कार्यकाल खत्म होने के बाद से अब तक अध्यक्ष सहित तीन सदस्यों के पद भी रिक्त हैं। प्रदेश की 3.5 करोड़ महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की पूरी लड़ाई अब एक अकेले सदस्य सचिव के भरोसे छोड़ दी गई है। आयोग के गांधीनगर स्थित सहायिका केंद्र में 22 केस और 2026 में अब तक 8 केस आ चुके हैं।
वहीं पिछले साल महिला थाना, सहायक केंद्र और एनजीओ के पास 3500 केस आए हैं। 2026 में हर महीने करीब 100 मामले लेकर महिलाएं संस्थाओं में पहुंच रही। इनमें घरेलू हिंसा, यौन शोषण के मामले सबसे अधिक है। हाईकोर्ट भी राज्य महिला आयोग में पिछले एक वर्ष से अध्यक्ष व सदस्यों के पद खाली रहने को गंभीर मानते हुए राज सरकार को नोटिस जारी कर चुका है।
Published on:
21 Apr 2026 02:22 pm
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