
आखिर केंद्र के नए नियम राजस्थान में क्यों नहीं लागू कर रहा परिवहन विभाग? (फोटो-एआई)
जयपुर: राजस्थान में बेलगाम रफ्तार और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। हर दिन प्रदेश की सड़कों पर जान जा रही हैं, लेकिन हादसों को रोकने के लिए जिम्मेदार परिवहन विभाग गहरी नींद में सोया हुआ है। चौंकाने वाला सच यह है कि केंद्र सरकार की ओर से मोटर व्हीकल एक्ट में बेहद सख्त और जीवन रक्षक प्रावधान किए जाने के बावजूद, राजस्थान का परिवहन विभाग पिछले पांच वर्षों से इन नियमों को फाइलों में दबाकर बैठा है।
वर्ष 2021 में आए नए प्रावधानों के अनुसार, कुल 30 गंभीर अपराध ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनमें यदि कोई चालक पहली बार अपराध करता पकड़ा जाता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस तत्काल 3 महीने के लिए अयोग्य कर दिया जाएगा। नए नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि वही चालक दूसरी बार या उससे अधिक बार अपराध करता पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस हमेशा के लिए वापस ले लिया जाएगा।
इनमें ओवरस्पीड, गलत दिशा में वाहन चलाना, मोबाइल पर बात करते हुए ड्राइविंग, गलत लेन में चलना, शराब या नशे की हालत में वाहन चलाना, अवैध रेसिंग, बिना मानक हेलमेट दोपहिया चलाना, निर्धारित संख्या से अधिक सवारी बैठाना तथा एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसे आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देना शामिल है।
चालक के दायित्वों का पालन नहीं करना, पुलिस के रोकने पर वाहन नहीं रोकना, क्षमता से अधिक वजन या सवारी ढोना, वाहन चोरी, प्रतिबंधित वस्तुओं का परिवहन, यात्रियों से दुर्व्यवहार, सार्वजनिक सेवा वाहन में धूम्रपान, सड़क पर वाहन खड़ा कर बाधा उत्पन्न करना, तय मार्ग से नहीं चलना, अधिक किराया वसूलना या सवारी ले जाने से इनकार करना जैसे अपराध भी गंभीर श्रेणी में रखे गए हैं।
तीसरी बार चालान होने के तीन साल बाद तक वह व्यक्ति सड़क पर वाहन नहीं चला सकता और तीन साल की लंबी अवधि बीतने के बाद ही वह नए लाइसेंस के लिए आवेदन करने का पात्र होगा। लेकिन राजस्थान में परिवहन विभाग पिछले पांच साल से इन नए प्रावधानों को दबाए बैठा है। लगातार हो रही मौतों के बाद भी इन्हें लागू नहीं किया गया। प्रदेश में अभी सिर्फ 3 महीने के लिए लाइसेंस अयोग्य (सस्पेंड) किए जा रहे हैं। आज तक एक भी आदतन अपराधी चालक का लाइसेंस स्थायी रूप से वापस नहीं लिया गया है।
नए प्रावधानों में कड़ा नियम यह भी है कि 3 महीने के लिए जो लाइसेंस अयोग्य होगा, उस चालक को वापस लाइसेंस पाने के लिए 'रिफ्रेशर ट्रेनिंग कोर्स' और 'सामुदायिक सेवा' का कोर्स करना अनिवार्य होगा। इस कोर्स को पूरा करने के बाद ही उसका लाइसेंस बहाल हो सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि राजस्थान में न तो रिफ्रेशर ट्रेनिंग की कोई व्यवस्था है और न ही सामुदायिक सेवा का कोई कोर्स करवाया जा रहा है। परिवहन विभाग आज भी पुराने आउटडेटेड नियमों के भरोसे ही पूरी लाइसेंस प्रक्रिया अपना रहा है।
यदि कोई चालक एक साल में 5 या अधिक बार अपराध करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय की गई है। साथ ही नियम 167 (12) के तहत चालान जमा न करने वालों के वाहनों को पोर्टल पर ब्लॉक करने का नियम है, ताकि वे गाड़ी ट्रांसफर या अन्य कोई काम न करवा सकें। लेकिन राजस्थान में इसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
सवाल: राजस्थान में मोटर व्हीकल एक्ट के 2021 में आए नए प्रावधानों को लागू क्यों नहीं किया?
जवाब: राजस्थान में सख्ती से कार्रवाई करने की तैयारी है, जल्द ही ये प्रावधान लागू किए जाएंगे।
सवाल: चालक के लिए रिफ्रेशर ट्रेनिंग और सामुदायिक सेवा अनिवार्य है। आपकी क्या तैयारी है?
जवाब: जब तक रिफ्रेशर ट्रेनिंग सेंटर शुरू नहीं होते, तब तक हम वैकल्पिक तौर पर व्यवस्था कर रहे हैं। इसकी प्लानिंग शुरू कर दी है।
सवाल: राजस्थान में हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं। विभाग क्या कर रहा है?
जवाबः विभाग का पूरा फोकस सड़क सुरक्षा पर है। इसके लिए ओवरलोड वाहनों पर शिकंजा, बिना मापदंड संचालित बसें और वाहनों के फिटनेस पर सख्ती कर दी गई है।
Updated on:
10 Jul 2026 04:14 pm
Published on:
10 Jul 2026 04:11 pm
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