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पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय ने दी फ्री वाई-फाई, यूजर्स देख रहे पोर्न साइट्स

राजस्थान विश्वविद्यालय में शुरू हुई फ्री वाइ-फाई सुविधा पर अश्लील सामग्री परोस रही वेबसाइट्स को जमकर देखा जा रहा है।

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rajasthan university

पकंज चतुर्वेदी, जयपुर।

राजस्थान विश्वविद्यालय में ई. एजुकेशन देने के लिए शुरू हुई फ्री वाइ-फाई सुविधा पर पोर्न वीडियो और अन्य अश्लील सामग्री परोस रही वेबसाइट्स को जमकर देखा जा रहा है।

विश्वविद्यालय परिसर में यह फ्री वाई-फाई सुविधा सिर्फ पंजीकृत विद्यार्थी, शिक्षक एवं कर्मचारियों के लिए ही है। इस सुविधा को संचालित करने वाले विश्वविद्यालय के इन्फोटेक सेंटर को इस गड़बड़झाले का पता चला तो फ्री वाई-फाई पर रजिस्टर्ड 50 यूजर्स और आधा दर्जन ऐसे कार्यालयों पर कार्रवाई की गई है, जहां लाइन के जरिए इन्टरनेट एक्सेस किया जा रहा था।

ऐसे खुलती है शौकीनों की पोल
इन्फोनेट सेंटर से हर दिन यूजर्स का रैंडम सर्वे किया जाता है। इसके अलावा हर दस दिन में बैकलॉग निकाला जाता है। इस सर्वे में शौकीनमिजाजी का शगल सामने आने पर सेंटर ने कार्रवाई शुरू की है। लाइन और मोबाइल पर पोर्न सर्च करने वाले मैक एड्रेस को ब्लॉक किया जा रहा है।

20 प्रतिशत यूजर्स पॉर्न साइट के फेर में
विश्वविद्यालय में करीब 8 हजार यूजर्स वाई-फाई सुविधा में पंजीकृत हैं। सेंटर के सूत्रों के अनुसार करीब 15 से 20 प्रतिशत यूजर्स पोर्न साइट्स सर्च कर रहे हैं। हर समय वाई-फाई से 1500 से 2000 हजार यूजर्स कनेक्ट रहते है। जबकि इससे अधिक होने पर स्पीड स्लो हो जाती है।

पहले खूब जांच, फिर खुली छूट
वाई-फाई पर पंजीकरण की प्रक्रिया देखें तो इसका उपभोग करने के लिए पहले यूजर्स को सेंटर में आवेदन करना होता है। उसके लिए विशेष आईडी और पासवर्ड आवंटित किया जाता है। शिक्षकों के लिए आईडी पासवर्ड की बाध्यता भी नहीं है। यूजर को एक बार रजिस्टे्रशन होने पर उसे कुछ भी देखने की खुली छूट मिल जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार वाई-फाई पर पर्याप्त सिक्युरिटी प्रबंध नहीं होने पर ऐसा हेाता है ।

फ्री में खुलते जर्नलस
विश्वविद्यालय का वाई-फाई ऐसे में तो बहुत फायदेमंद है। इससे ई-एजुकेशन ही नहीं प्राप्त करते है। बल्कि इससे शिक्षक और शोधार्थी फ्री में जर्नलस् फ्री में डाउनलोड कर सकते है।

हर दिन रैंडम सैंपल लेकर नजर रखी जाती है। समय-समय पर बैक लॉग निकालकर अडल्ट साइट सर्च करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
वी.के. सक्सेना, डायरेक्टर इंफोंनेट सेंटर