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महारानी कॉलेज तय करेगा जीत—हार का अंतर, इसलिए वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने पर प्रत्याशियों ने झोंकी ताकत

राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को जीतने के लिए प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रत्याशियों का मुख्य फोकस महारानी कॉलेज पर रहा, क्योंकि प्रत्याशियों के जीत—हार का अंतर यहीं से तय होगा।

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महारानी कॉलेज तय करेगा जीत—हार का अंतर, इसलिए वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने पर प्रत्याशियों ने झोंकी ताकत

भवनेश गुप्ता . जयपुर। छात्रसंघ चुनाव के तहत महारानी कॉलेज में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रत्याशी तैयारी करते रहे। बुधवार को यहां के मतदाताओं को रिझाने के लिए कई तरह के लुभावने वादे किए गए। कारण, महारानी कॉलेज में ही सबसे ज्यादा मतदाता है। यहां छात्र मतदाताओं की संख्या 6390 है। इसीलिए एबीवीपी, एनएसयूआई व निर्दलीय प्रत्याशियों का ज्यादातर समय डेरा यहीं लगा हुआ है। मुख्य तौर पर यहीं से प्रत्याशियों के जीत—हार के समीकरण तय होते रहे हैं। अभी तक कॉलेज में 45 फीसदी से अधिक मतदान नहीं हो पाया है। यही कारण है कि सभी का जोर यही है कि यहां वोटिंग प्रतिशत बढ़ाया जाए। उनका मानना है कि यदि कॉलेज का वोटिंग प्रतिशत बढ जाए तो चुनावों के रुझानों में भी बदलाव आने की संभावना हो सकती है।


घर से लाने—छोड़ने तक की सुरक्षा की जिम्मेदारी..
प्रत्याशी महारानी कॉलेज में प्रचार—प्रसार के दौरान छात्राओं से वोट डालने की जोर डालते रहे। इतना ही नहीं छात्राओं को मतदान के दिन घर से लाने और छोड़ने तक के सुरक्षित सफर की जिम्मेदारी लेते रहे। इस बीच प्रत्याशियों के अलावा कॉलेज प्रशासन ने भी छात्राओं को मतदान करने के लिए प्रेरित किया।


यह रही मतदान की स्थिति
2015 : 28 प्रतिशत
2016 : 38 प्रतिशत
2017 : 45 प्रतिशत
मतदाता संख्या
2017 : 6512
2018 : 6390

मोबाइल स्कैनर ने किया काम करना बंद
विश्वविद्यालय में फर्जी वोटिंग को रोकने के लिए मंगवाई गए मोबाइल स्कैनर मशीनें चुनाव से दो दिन पहले ही 'कबाड़Ó में तब्दील हो गई। साढे आठ लाख रुपए की कीमत से मंगवाई गई मशीनों ने बुधवार को बारिश होते ही काम करना बंद कर दिया। इसके बाद छात्र-छात्राओं को शिक्षकों व गाडर््स ने आइडी-कार्ड चैक करके ही अंदर प्रवेश दिया।

—मतदान को लेकर कॉलेज प्रशासन छात्राओं को जागरुक कर रहा है। कक्षाओं में काउंसलिंग तक कराई जा रही है। हमने पिछली साल रिकॉर्ड बनाया था कि जो अभी तक सबसे ज्यादा वोटिंग हुई थी। इस बार भी प्रयास रहेगा। —अल्पना कटेजा, प्रिंसिपल महारानी कॉलेज