
जयपुर।
राजकीय संस्कृत महाविद्यालयों में अनुदानित महाविद्यालयों से समायोजित शिक्षक इन दिनों सरकार की उपेक्षा के कारण आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। इन शिक्षकों को राजस्थान स्वेच्छया ग्रामीण शिक्षा सेवा नियम 2010 के बिंदु 5 (4) में स्पष्ट प्रावधान होने के बाद भी करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) का लाभ, इनकी अनुदानित पदों पर की गई सेवा अवधि की गणना करते हुए नहीं दिया जा रहा है।इस दायरे में आने वाले ऐसे करीब 26 शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ भी नहीं दिया गया है।
गौरतलब है कि इन शिक्षकों को जुलाई 2011 में राज्य सेवा में समायोजित किया गया था परंतु अभी तक इनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है ।
'इंतज़ार' में कुछ तो दुनिया ही छोड़ गए
सेवानिवृत सहायक प्रोफ़ेसर शिव शरण नाथ त्रिपाठी ने 'पत्रिका' को अनुदानित महाविद्यालयों से राजकीय संस्कृत महाविद्यालयों में समायोजित शिक्षकों की व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि सी.ए.एस का उचित लाभ देकर वेतन निर्धारण होने का इंतजार इतना लंबा हो चला है कि अधिकांश शिक्षक तो सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। मात्र 7 शिक्षक ऐसे हैं जो वर्तमान में सेवा में हैं। जबकि उचित वेतन का इंतजार करते चार शिक्षकों का सेवानिवृत्ति के पश्चात् निधन भी हो चुका है।
अदालती आदेश हो रहे हवा
संस्कृत विभाग की अनुदानित संस्थाओं में कार्य कर चुके कार्मिकों को न्यायालय के आदेश के बावजूद, छठे वेतनमान की एरियर राशि का भुगतान भी राज्य सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। यही कारण है कि संबंधित कर्मचारी वर्षों से आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार अनुदानित संस्थाओं से राजकीय सेवा में समायोजित विद्यालय शिक्षक तथा मंत्रालयिक कर्मचारियों को सभी परिलाभ RVRES ACT 2010 के अनुसार दिए जा चुके हैं तथा सामान्य शिक्षा के महाविद्यालय समायोजित शिक्षकों को भी CAS आदि के परिलाभ प्रदान किए जा चुके हैं।
Published on:
18 Apr 2023 03:22 pm
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