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क्या जानते हैं ‘पानी की टंकी’ पर प्रोटेस्ट के बाद प्रदर्शनकारियों के साथ क्या होता है?

Rajasthan Water Tank Protest Law : राजस्थान में क्यों बार-बार पानी की टंकी पर चढ़ जाते हैं प्रदर्शनकारी? जानिए 'शोले स्टाइल' प्रोटेस्ट के पीछे का सच, BNS की धाराएं, ज़मानत के नियम और पुलिस का नया एक्शन प्लान।
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Rajasthan Water Tank Protest Law BNS Rules Rescues Cost Recovery Action

NSUI Student leaders protest at Water Tank

राजस्थान में अपनी मांगों को मनवाने के लिए पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन करना एक चर्चित लेकिन जानलेवा तरीका बन चुका है। जयपुर के गांधी नगर रेलवे स्टेशन और टोंक फाटक के पास NSUI के छात्रनेताओं द्वारा 27 घंटे से अधिक समय तक पानी की टंकी पर चढ़कर किया गया उग्र प्रदर्शन इसका सबसे ताजा उदाहरण है। वर्ष 2022 से बंद पड़े छात्रसंघ चुनावों की बहाली और नीट (NEET) पेपर लीक प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज के विरोध में छात्रों ने इस खतरनाक रास्ते को चुना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब 20-30 मीटर ऊंची टंकी से उतरकर प्रदर्शनकारी नीचे आते हैं, तो उनके साथ कानूनी रूप से क्या होता है?

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत ऐसे प्रदर्शनकारियों पर दर्ज होने वाले मुकदमों, ज़मानत की शर्तों और राजस्थान पुलिस द्वारा रेस्क्यू का खर्चा वसूलने के नए प्लान की पूरी परतें प्रशासनिक और कानूनी दृष्टिकोण से समझिए।

बार-बार पानी की टंकी पर क्यों चढ़ जाते हैं प्रदर्शनकारी?

राजस्थान में चाहे बेरोजगारी का मुद्दा हो, शिक्षकों के तबादले हों या राजनीतिक मांगें, टंकी पर चढ़ना सबसे बड़ा हथियार माना जाता है। इसके पीछे कुछ प्रमुख वजहें मानी जा सकती हैं।

त्वरित और मीडिया अटेंशन: जमीन पर धरना देने की तुलना में टंकी पर चढ़ते ही खबर मिनटों में लोकल से लेकर नेशनल मीडिया की हेडलाइंस बन जाती है।

प्रशासन पर अत्यधिक दबाव: ऊंचाई से गिरने या कूदने का जोखिम होने के कारण पुलिस, जिला प्रशासन (कलेक्टर/एसडीएम) और SDRF की टीमें तुरंत दौड़ती हैं और प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह बैकफुट पर आ जाती है।

बातचीत की मजबूरी: जमीन पर पुलिस बल प्रयोग करके भीड़ हटा सकती है, लेकिन ऊंचे ढांचे पर चढ़े व्यक्ति पर लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता। ऐसे में आला अधिकारियों को खुद चलकर मौके पर आकर वार्ता करनी पड़ती है।

कौन-कौन सी BNS धाराएं लगती हैं?

देश में लागू हुई नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत सरकारी संपत्तियों पर चढ़कर हंगामा करने को गंभीर अपराध माना गया है।

Section 221 BNS (पुरानी IPC 186): जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) या रेलवे की संपत्ति पर अवैध रूप से चढ़कर सरकारी काम में बाधा डालना।

Section 329 BNS (पुरानी IPC 447): बिना अनुमति किसी प्रतिबंधित सरकारी ऊंचे ढांचे में जबरन प्रवेश करना।

Section 114 BNS (पुरानी IPC 336): ऐसी लापरवाही या उतावलापन करना जिससे खुद की और आम जनता की सुरक्षा व जीवन खतरे में पड़े।

Section 226 BNS (पुरानी IPC 309): सरकारी अधिकारियों को अनुचित दबाव में लाने के लिए आत्महत्या या कूदने की धमकी देना।

Section 170/189 BNSS (पुरानी CrPC 107/151): मौके पर माहौल बिगड़ने से रोकने और शांति भंग की आशंका में पुलिस द्वारा मौके से हिरासत में लिया जाना।

सरकारी काम के लिए दबाव बनाने पर सजा

नई BNS में धारा 226 को विशेष रूप से इसी तरह के "टंकी/टॉवर प्रोटेस्ट" और "आमरण अनशन" के जरिए दबाव बनाने को रोकने के लिए शामिल किया गया है। किसी लोक सेवक (Public Servant) को उसकी कानूनी ड्यूटी करने से रोकने या मनमाफिक काम कराने के लिए खुदकुशी की धमकी देना।

सजा का प्रावधान: कोर्ट द्वारा दोष सिद्ध होने पर 1 वर्ष तक की साधारण कैद, आर्थिक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। इस नई धारा के तहत अदालत दोषी को जेल भेजने के बजाय अस्पताल या सार्वजनिक स्थानों पर सफाई जैसी समाज सेवा की सजा भी सुना सकती है।

जेल या ज़मानत: जानिए क्या कहता है कानून?

आम तौर पर टंकी से उतरने के बाद पुलिस कानूनी केस दर्ज जरूर करती है, लेकिन प्रदर्शनकारी तुरंत जेल जाने से बच जाते हैं।

अधिकांश धाराएं ज़मानती : BNS की धारा 221, 329, 114 और 226 सभी मुख्य रूप से ज़मानती अपराधों की श्रेणी में आती हैं।

थाने या कोर्ट से ज़मानत: टंकी से नीचे उतारे जाने के बाद पुलिस आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए ले जाती है और कागजी प्रक्रिया पूरी कर कोर्ट या थाने से ही ज़मानत मिल जाती है।

कैरियर पर पड़ता है असर: भले ही तुरंत ज़मानत मिल जाए, लेकिन यदि कोर्ट में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर देती है, तो संबंधित छात्र या व्यक्ति के पुलिस वेरिफिकेशन और सरकारी नौकरी के कैरेक्टर सर्टिफिकेट में बड़ी अड़चन खड़ी हो जाती है।

रेस्क्यू ऑपरेशन का खर्चा वसूलने की तैयारी

बार-बार होने वाले इस प्रोटेस्ट से परेशान होकर राजस्थान पुलिस और प्रशासन ने अब कड़ा वित्तीय रुख अपनाना शुरू कर दिया है।

SDRF और पुलिस जाब्ते का खर्च: पानी की टंकी के नीचे बिछाए जाने वाले जाले, क्रेन, SDRF की रेस्क्यू टीमों, फायर ब्रिगेड और दिन-रात तैनात रहने वाले पुलिस बल का कुल खर्चा लाखों में आता है।

हर्जाना वसूली नोटिस: राजस्थान पुलिस अब टंकी पर चढ़ने वाले नेताओं, अभ्यर्थियों और उनके संगठनों से इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रशासनिक खर्च वसूलने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर रही है।

धारा 163 BNSS (पुरानी CrPC 144) का उल्लंघन: संवेदनशील सरकारी टंकियों के आसपास पहले से पाबंदी के आदेश रहते हैं, जिनका उल्लंघन करने पर सीधी गिरफ्तारी और प्रशासनिक जब्ती की जा सकती है।

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