
जयपुर।
राष्ट्रीय महिला आयोग आज अपना 30वां स्थापना दिवस मना रहा है। लेकिन राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में विडम्बना इस बात की है कि इस महत्वपूर्ण दिन को भी राज्य महिला आयोग में अध्यक्ष पद खाली है। राज्य सरकार पिछले करीब तीन साल से इस पद पर अब तक नियुक्ति नहीं कर पाई है। दरअसल, प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध के बाद विरोधी राजनितिक दलों के अलावा विभिन्न महिला और सामाजिक संगठनों ने राज्य महिला आयोग अध्यक्ष नियुक्ति को लेकर पुरज़ोर आवाज़ भी उठाई, लेकिन नियुक्ति को लेकर अब तक बाट जोहि जा रही है।
अक्टूबर 2018 से खाली पड़ा अध्यक्ष पद
राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष का पद पिछले तीन वर्ष से भी ज़्यादा समय से रिक्त पड़ा हुआ है। पिछली राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा का कार्यकाल 19 अक्टूबर, 2018 को समाप्त हो गया था, जिसके बाद से आयोग बिना अध्यक्ष के है। वहीं दिलचस्प बात ये है कि राज्य में महिला आयोग का गठन तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान ही (1998-2003) अस्तित्व में आया था।
हाईकोर्ट भी जता चुकी है चिंता
राज्य महिला आयोग सहित अन्य वैधानिक निकायों के खाली पड़े पदों और नियुक्तियों में देरी को लेकर हाईकोर्ट भी चिंता जाता चुकी है। अदालत ने पूर्व में दिए एक आदेश में सरकार को आयोगों में जल्द से जल्द नियुक्तियां करने के आदेश भी दिए थे। कोर्ट ने सरकार से कहा था कि ये वैधानिक निकाय सुशासन का एक अभिन्न अंग हैं और इनका सांगठनिक ढ़ांचा समय पर तैयार करने की जरूरत है। लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों के बाद भी सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंगी और अब तक महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं।
इधर, राज्य महिला आयोग में रिक्त पदों के संबंध में दायर एक अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के मुख्य सचिव और महिला एवं बाल विकास राज्य विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किया।जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विनोद कुमार भरवानी की पीठ सोशल एक्टिविस्ट ईश्वर प्रसाद खंडेलवाल द्वारा दायर अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने राज्य में महिला आयोग बोर्ड के गठन के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
इधर सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने आश्वस्त किया था कि राजस्थान राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति दो महीने की अवधि के भीतर कर दी जाएगी।
मुंह चिढ़ा रहे महिला अपराध के आंकड़े (विगत 3 वर्ष के)
- कुल मामले दर्ज- 6 लाख 51 हजार से अधिक
- महिलाओं पर अत्याचार के मामले- 1 लाख 17 हजार से अधिक
- वर्ष 2021 में बलात्कार के 6 हज़ार 337 मामले, 2020 की तुलना में 19.3 फीसदी बढ़ोतरी
- आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार- 5800 से अधिक मामले
- महिलाओं-बच्चियों से दुष्कर्म मामलों में पहले स्थान पर राजस्थान
- दलित-आदिवासियों के साथ अत्याचार मामलों में दूसरे स्थान पर राजस्थान
- बालिकाओं पर अत्याचार मामले में स्पेशल पॉक्सो एक्ट के तहत राजस्थान की पॉक्सो कोर्ट में करीब 7 हज़ार मामले लंबित
- लगभग हर दिन सामने बलात्कार सहित अन्य गंभीर मामले आ रहे सामने
Published on:
31 Jan 2022 02:52 pm
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