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चुनावी साल में सरकार लाई राजस्थानी का मुद्दा, नौकरी में प्राथमिकता के लिए नियमों में संशोधन करने की तैयारी

चुनावी साल में सरकार 'राजस्थानी' का मुद्दा भी लाई है।

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जयपुर। चुनावी साल में सरकार 'राजस्थानी' का मुद्दा भी लाई है। सरकार ने निजी क्षेत्र के उद्योगों में राजस्थानियों को नौकरी में प्राथमिकता दिलाने और बाहरी कर्मचारियों से 10 से 15 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन अधिक दिलाने के लिए नियमों में संशोधन करने की तैयारी शुरू कर दी है।

राज्य में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा बन रहा है। सरकार का दावा है कि गत साढ़े चार वर्ष में रोजगार के 12 लाख से अधिक अवसर पैदा किए गए लेकिन न तो युवा इस आंकड़े को मान रहे हैं और न विपक्षी दल।

ऐसे में सरकार अब यह दावा कर रही है कि रोजगार के अवसरों का अधिकांश लाभ बाहरी लोगों ने उठाया है। राजस्थानियों के हिस्से में महज 30 से 35 फीसदी अवसर ही आए हैं। सरकार का मानना है कि उद्यमियों को रियायतें-सुविधाएं देने के बावजूद राजस्थानियों के हाथ कुछ नहीं लग रहा है।

वादा अब आया याद, बनाई कमेटी
भाजपा ने सुराज संकल्प पत्र में राजस्थान के निवासियों को निजी उद्योगों में नौकरी में प्राथमिकता दिलाने का वादा किया था। लेनि साढ़े चार वर्ष में सरकार ने इस पर कोई काम नहीं किया। अब निजी क्षेत्रों के उद्योगों में नौकरी और वेतन देने के नियमों में संशोधन के लिए सरकार ने उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव स्वरूप की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है।

कैबिनेट की बैठक में हो चुकी चर्चा
गत दिनों कैबिनेट की बैठक में चर्चा के दौरान अधिसंख्य मंत्रियों ने राजस्थानियों का वेतन बाहरी लोगों के मुकाबले 15 से 25 हजार रुपए अधिक करने का प्रस्ताव रखा था। सरकार का तर्क है कि जीएसटी लागू होने से पहले तक औद्योगिक इकाई में होने वाले उïत्पादन पर राज्य सरकार को सीधा कर मिलता था। इससे सरकार को राजस्व मिलता था लेकिन जीएसटी लागू होने से यह हालात बदल गए हैं। ऐसे में सरकार कुछ नहीं तो कम से कम राजस्थान के निवासियों को इन उद्योगों से कुछ लाभ दिला सकती है।

फैक्ट फाइल
- गत साढ़े चार साल में रोजगार के अवसर : 12.50 लाख
- राजस्थानियों को मिले अवसर : 4.27 लाख
- गैर राजस्थानियों को मिले अवसर : 8.12 लाख
(अनुमानित)

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