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80 फीट की रोड अतिक्र मण से 40 की भी नहीं बची, उस पर भी बना दिया डिवाइडर

मानसरोवर स्थित रजत पथ निगम ने बेवजह बनाया डिवाइडर, 11 जगह लगा दिए कट   -चौराहे पर शाम को दो घंटे रहता बुरा हाल, जाम की वजह से लोगों का निकलना हो जाता मुश्किल

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हैडिंग...80 फीट की रोड पर अतिक्र मण से 40 की भी नहीं बची, उस पर भी बना दिया डिवाइडर

हैडिंग...80 फीट की रोड पर अतिक्र मण से 40 की भी नहीं बची, उस पर भी बना दिया डिवाइडर

जयपुर. सड़क पर बढ़ते यातायात के दबाव से निजात पाने के लिए नगर निगम ने रजत पथ पर डिवाइडर बनवाया। इससे यातायात तो सुगम नहीं हुआ। जाम की परेशानी और खड़ी हो गई। 80 फीट के रजत पथ पर सड़क के दोनों ओर 10-10 फीट तक कई जगह अतिक्रमण हैं। इसके आगे लोग गाडिय़ां खड़ी कर लेते हैं। कई जगह सड़क पर ही पोल लगे हुए हैं। ऐसे में टै्रफिक के लिए 40 फीट की सड़क भी नहीं बचती है। खुद निगम के अधिकारी भी मानते हैं कि यहां पर डिवाइडर बनाना उचित नहीं था। क्योंकि सड़क के दोनों ओर व्यवसायिक गतिविधि होती है। ऐसे में वाहनों के खड़े रहने से वाहनों के चलने के लिए रास्ता कम मिल पाता है।
दरअसल, मानसरोवर के रजत पथ पर करीब दो वर्ष पहले निगम ने डिवाइडर बनाने का काम शुरू हुआ। लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन विरोध दरकिनार करते हुए निगम ने दो करोड़ रुपए खर्च कर बेवजह डिवाइडर बना दिया। निर्माण कार्य के दौरान करीब सवा किमी के डिवाइडर में दुपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए 11 जगह कट छोड़ दिए। इससे शाम को जाम की स्थिति और पैदा हो जाती है। रजत पथ चौराहे पर शाम सात बजे से नौ बजे तक बुरा हाल रहता है।

ये होते बेहतर विकल्प
-डिवाइडर बनाने की बजाय सड़क सीमा से अतिक्रमण हटाकर गाडिय़ों की पार्किंग व्यवस्थित तरीके से करवाते तो जाम नहीं लगता।
-सड़क पर कई जगह पोल लगे हुए हैं। इन पर टेलीकॉम कम्पनियों की लाइनें हैं। इन पोल को हटाकर यातायात सुगम किया जा सकता है।

मॉडल रोड नहीं, सिर्फ पैसे का दुरुपयोग
-मानसरोवर जोन के अधिकारियों की मानें तो महापौर रहते हुए विष्णु लाटा ने रजत पथ को मॉडल रोड के रूप में विकसित करने का प्रयास किया था। उन्हीं के कार्यकाल में दो करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। स्वर्ण पथ सहित कुछ अन्य मार्गों पर भी इसी तरह के काम होने थे। हालांकि, बाद में मॉडल रोड बनाने का काम आगे नहीं बढ़ा।
-डिवाइडर का काम पूरा करने से पहले निगम की इंजीनियरिंग शाखा ने प्रयोग के तौर पर 50 मीटर हिस्से में डिवाइडर बनवाया। वह प्रयोग यातायात में बाधक साबित हुआ। इसके बाद भी डिवाइडर का काम पूरा कर दिया गया।