
जयपुर। किसी जमाने में राजधानी जयपुर के बाशिंदों का हलक तर करने वाला एकमात्र पेयजल स्त्रोत रामगढ़ डेम प्रशासनिक कुप्रबंधन के चलते दम तोड़ गया है। पेयजल की उपलब्धता खत्म होते ही प्रशासन ने डेम से मुंह मोड़ लिया। वहीं एक बार फिर से रामगढ़ डेम के दिन फिरने वाले हैं। जयपुरवासियों के लिए एक अच्छी खबर है- कभी राजधानी का जल जीवन कहलाने वाला रामगढ़ डेम अब एक बार फिर से नई पहचान पाने जा रहा है। प्रशासन की अनदेखी और जल संकट से जूझते इस ऐतिहासिक बांध का अब कायाकल्प होगा। करीब 3.5 करोड़ रुपए की लागत से रामगढ़ डेम का सौंदर्यकरण करने का काम कल से शुरू होने जा रहा है। जिससे यह इलाका अब हॉट टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में उभरेगा।
डेम की पाल पर ये होंगे सुधार कार्य
जानकारी के अनुसार जयपुर जिले के रामगढ़ डेम पर तीन करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न सुधार कार्य शुरू होने वाले हैं। डेम की पाल पर 11 अप्रेल से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए लागत से सुधार कार्यों का शुभारंभ होने वाला है। बांध की पाल पर 1500 मीटर लंबी डामर की सड़क निर्माण प्रस्तावित है। बांध की पाल पर सुरक्षा दीवार बनेगी और पर्यटकों के बैठने के लिए सीढ़ियों का निर्माण भी कराया जाएगा। इसके अलावा डूब क्षेत्र की सीढ़ियों की मरम्मत के साथ कंट्रोल रूम कर गेस्ट हाउस के मरम्मत कार्य भी होंगे। बांध के गुंबद का भी सौंदर्यन नए सिरे से शुरू होगा।
इतिहास के झरोखे में रामगढ़ बांध
रियासत कालीन रामगढ़ बांध का विस्तार 15.5 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसका शिलान्यास तत्कालीन महाराजा माधोसिंह ने 30 दिसम्बर 1897 को किया था और यह 6 साल बाद यह बांध 1903 में बनकर तैयार हुआ था। तब इसके निर्माण पर 5 लाख 84 हजार 593 रुपए खर्च हुए थे. इसकी भराव क्षमता 65 फीट है।
कभी विश्वभर में चर्चा में रहा
1982 के एशियाई खेलों के दौरान रामगढ़ झील पर नौकायन स्पर्धाएँ आयोजित की गई थीं। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासनिक कुप्रबंधन के चलते रामगढ़ बांध ने दम तोड़ दिया। वर्ष 2011 में राजस्थान उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को जलग्रहण क्षेत्र में आए कई अतिक्रमणों को हटाने का आदेश दिया था, जो बांध में पानी के मुक्त प्रवाह को रोकते थे। हालाँकि बांध के जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण अभी भी मौजूद है। राजस्थान पत्रिका ने भी मुहिम चलाकर मरते रामगढ़ डेम को बचाने के लिए किए प्रयास बांध के लिए अब संजीवनी साबित हो रहे हैं।
रामगढ़ वन्यजीव अभयारण्य
झील और आस-पास के इलाकों के घने जंगल को भारत सरकार ने 1982 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया था। यहाँ एक पुराने किले और जाम्बव माता के मंदिर के खंडहर हैं। अभयारण्य खटियार-गिर शुष्क पर्णपाती वन पारिस्थितिकी क्षेत्र का हिस्सा है । यह चीतल और नीलगाय सहित वन्यजीवों की एक विस्तृत श्रृंखला का घर है ।
रामगढ़ बांध जलग्रहण क्षेत्र
बांध के जलग्रहण क्षेत्र में कई गांव आते हैं। इनमें चांदावास (आमेर), ममटोरी कला, सांगावाला और बिशनपुरा शामिल हैं। हालांकि बांध के बहाव क्षेत्र में हुए अतिक्रमण आज भी कायम हैं जिसके चलते बांध में पानी की आवक हर साल लगभग नगण्य रहती है। वहीं अब राज्य सरकार बांध में अन्य नदियों से पानी लाने की कार्य योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है।
Published on:
10 Apr 2025 09:35 am
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