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RGHS Update: निजी अस्पतालों ने दी आरजीएचएस MOU समाप्त करने की चेतावनी, इलाज कराने पहुंचे मरीज का नाम योजना से गायब

राजस्थान में RGHS योजना को लेकर विवाद गहरा गया है। निजी अस्पतालों ने सरकार को चेतावनी दी है कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे RGHS से अपना MOU समाप्त कर देंगे। वहीं, इलाज कराने पहुंचे कई मरीजों के नाम योजना से गायब मिलने पर अस्पतालों और मरीजों में नाराजगी बढ़ गई है।

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जयपुर

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Arvind Rao

May 19, 2026

RGHS Update

RGHS Update Private Hospitals Warning to End RGHS MoU (Patrika Photo)

Rajasthan RGHS News: आरजीएचएस योजना के विरोध में राज्यभर के निजी अस्पतालों और चिकित्सकों का बहिष्कार एक महीने से अधिक समय से जारी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) अध्यक्ष डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि पिछले करीब 8 महीने से अस्पतालों का भुगतान अटका हुआ है, जिससे निजी चिकित्सा क्षेत्र में भारी नाराजगी है।

उन्होंने कहा कि योजना में स्पष्ट नियम, एसओपी, न्यूनतम डॉक्यूमेंट प्रोटोकॉल और भुगतान की निश्चित समयसीमा तय नहीं होने से अस्पतालों को परेशानी हो रही है। जोनल सेक्रेटरी डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि निजी अस्पताल आरजीएचएस से अपने एमओयू समाप्त करने पर भी विचार कर सकते हैं।

आरजीएचएस को निजी हाथों में देने का विरोध, दिया अल्टीमेटम

राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना में दो महीने से भी ज्यादा समय से कर्मचारियों को उपचार नहीं मिलने से कर्मचारी संगठन अब आर-पार की लड़ाई के रास्ते पर हैं। सोमवार को अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें योजना को निजी बीमा कंपनी को देने की सरकार की मंशा का विरोध किया गया।

महासंघ (एकीकृत) अध्यक्ष गजेंद्र राठौड़ ने कहा कि 25 सूत्री मांगों को लेकर महासंघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। आंदोलन के प्रथम चरण के तहत मंगलवार को सरकार को ज्ञापन देकर सात दिन का अल्टीमेटम दिया जाएगा। सरकार समाधान नहीं करती है तो पूरे प्रदेश के कर्मचारी सात दिन बाद एक घंटे का कार्य बहिष्कार करेंगे।

इलाज कराने पहुंचे तो पता चला, 21 साल के बेटे का नाम योजना से गायब

राज्य सरकार की ओर से संचालित स्वास्थ्य योजनाओं में अलग-अलग नियम मरीजों के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से संचालित राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में 25 वर्ष आयु तक के आश्रित बच्चों को योजना के लाभ में शामिल किया गया है।

जबकि विभाग की ही अन्य योजनाओं में आयु सीमा 21 वर्ष कर दी गई है। कई मामलों में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने के बाद पता चलता है कि कार्ड से नाम हटा दिया गया है। इलाज के समय कार्ड अमान्य बताने पर परिवारों को निजी खर्च उठाना पड़ रहा है।

दरअसल, आरजीएचएस योजना के अंतर्गत मरीजों को आउटडोर और इनडोर दोनों का ही लाभ दिया जाता है। जबकि विभाग की ही संचालित केवल इनडोर योजना के लाभार्थियों के लिए नियम बदलकर 21 वर्ष कर दिया गया है।

इन लाभार्थियों का कहना है कि मौजूदा समय में 25 वर्ष की आयु तक के युवा माता-पिता पर ही निर्भर रहकर अध्ययन करते हैं। ऐसे में उन्हें इलाज के लाभ से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है।

इस मामले में आरजीएचएस योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरजीलाल अटल का कहना है कि आरजीएचएस के नियम वित्त विभाग द्वारा बनाए गए है, जबकि अन्य लाभार्थियों के नियम संबंधित विभाग से प्राप्त होते हैं। उसी आधार पर उन्हें लाभ दिया जाता है।

उठते सवाल…

  • आश्रित की अधिकतम आयु 21 वर्ष या 25 वर्ष?
  • अलग-अलग विभागों में अलग नियम क्यों?
  • नाम हटाने से पहले सूचना क्यों नहीं?
  • इलाज के दौरान अचानक अमान्य होने की जिम्मेदारी किसकी?