
many BJP leaders not included in meeting held in Pali
जयपुर। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवारों की घोषणा से राजस्थान में वर्तमान पार्टी विधायकों के चेहरे खिल गए हैं। दोनों ही राज्यों के टिकट वितरण में जिस तरह पार्टी आलाकमान के जमीनी सर्वे धरे रह गए और मुख्यमंत्रियों ने उन्हें टिकट दिलाया जिन्हें वे चाहते थे, उससे लगता है कि राजस्थान में भी मुख्यमंत्री की ही चलेगी और वे उन्हें टिकट दिलाने में कामयाब होंगी, जिनके लिए दो दिन पहले वे पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अड़ गई थीं।
तीनों राज्यों को लेकर पार्टी क्षेत्रों में कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि राष्ट्रीय नेतृत्व ने अपने सर्वे कराए हैं और उनके आधार पर कमजोर प्रदर्शन और खराब छवि वाले मौजूदा विधायकों के टिकट बड़ी संख्या में कटेंगे और इस प्रक्रिया में केंद्रीय नेतृत्व क्षेत्रीय क्षत्रपों की ज्यादा नहीं सुनेगा। इसके विपरीत दोनों राज्यों की जो सूचियां आई हैं और जिस तरह बड़ी संख्या में वर्तमान विधायक अपने—अपने प्रादेशिक नेतृत्व की मदद से स्वयं टिकट पाने और अथवा अपना टिकट कटने की स्थिति में अपने परिजनों को टिकट दिलाने में कामयाब हो गए हैं उससे सबकी निगाहें अब राजस्थान की सूचियों पर टिक गई हैं कि क्या यहां भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ही दोहराया जाएगा।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जो पैनल दिल्ली बनाकर लेकर गईं थीं। माना जा रहा है कि उनमें थोड़ा-बहुत परिवर्तन के बाद उन्हीं के नामों को मंजूरी दे दी जाएगी। मप्र और छग में भी एंटी इंकंबेंसी को कम करने के लिए कुछ टिकट काटे गए हैं, कुछ टिकट परिवार में ही बदल दिए गए हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी चाहती हैं कि बड़े राजनीतिक परिवारों में से जिनके टिकट काटे जाएं, उन्हीं परिवारों में से टिकट दिए जाएं। श्रीगंगानगर के टिकट वितरण चर्चा के दौरान एक सीट पर पार्टी जिसका टिकट काटना चाह रही है, वहां परिवार में से ही टिकट देना चाह रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे के ज्यादातर नामों को हरी झंडी दे दी जाएगी।
उम्मीद के अनुसार नहीं काट सके टिकट
मप्र और छग में पन्द्रह साल से भाजपा की सरकारें हैं। माना जा रहा था कि दोनों ही जगह बड़े स्तर पर टिकट कटेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। मध्यप्रदेश की शुक्रवार को जो सूची जारी हुई है, उसमें पार्टी 34 टिकट ही काट पाई है, वहीं छत्तीसगढ़ में तो ज्यादातर पुराने ही चेहरे सामने आए हैं। जहां टिकट काटे गए हैं, वहां वर्तमान विधायक के परिवार में से ही किसी को टिकट दिया गया है।
वहां टिकट कटा तो रिश्तेदारों को मिला
मध्यप्रदेश...
177 उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। टिकट बंटवारे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ही चली। उन्हीं के पैनल पर पार्टी ने भरोसा जताया है। असंतोष रोकने के लिए पार्टी ने जो 30 नए चेहरे उतारे हैं, उनमें ज्यादातर नेताओं के रिश्तेदार हैं।
छत्तीसगढ़...
उम्मीदवारों के चयन में रमन सिंह की ही चली। सीएम ने हर सीट पर अपने उम्मीदवार का चयन करवाया। इसी वजह से हर सीट पर नए चेहरे कम दिख रहे हैं। जिन विधायकों का टिकट कटा है, उनमें से अधिकतर के रिश्तेदारों को ही टिकट मिला है।
सवाल...क्या राजस्थान में काट पाएंगे ज्यादा टिकट?
ऐसा माना जा रहा है कि सरकार की एंटी इंकंबेंसी को दूर करने के लिए पार्टी बड़े स्तर पर टिकट काटने की तैयारी कर रही है। वर्तमान विधायकों में कम से कम 60 विधायकों के टिकट कटने तो तय माने जा रहे थे, लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में जो हुआ उसके बाद लगता है कि यहां भी टिकट काटने जैसा कुछ नहीं होगा।
कांग्रेस को भाजपा की सूची का इंतजार
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पहली सूची जारी करने में भाजपा ने कांग्रेस का इंतजार नहीं किया और राजस्थान में भी ऐसा ही माना जा रहा था कि भाजपा की पहली सूची कांगे्रस से पहले जारी हो जाएगी, लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर हुए असंतोष के चलते ऐसा नहीं हो सका। कांग्रेस ने भी ऐसा ही किया और सूची जारी करने के बजाय दिवाली के बाद ही सूची जारी करने का फैसला किया है।
Updated on:
03 Nov 2018 09:52 am
Published on:
03 Nov 2018 09:52 am
