
RTH bill : एसएमएस अस्पताल में मरीजों की हालत खराब, सीनियर डॉक्टर दे रहे हैं सिर्फ दवाई,
जयपुर। राइट टू हेल्थ बिल को लेकर डॉक्टरों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पिछले 5 दिनों से प्रदेश के सभी निजी अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम बंद है। जिसकी वजह से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एसएमएस अस्पताल के हालात सबसे ज्यादा बुरे हैं। जहां मरीजों की देखरेख सही से नहीं हो पा रही है। रेजिडेंट डॉक्टर के कार्य बहिष्कार की वजह से सीनियर डॉक्टर मरीजों को देख रहे हैं । अब मरीजों को सिर्फ दवाई देकर घर भेजा जा रहा है। बहुत ही ज्यादा सीरियस कंडीशन होने पर मरीज को भर्ती किया जा रहा है। इसके अलावा वार्ड में भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज कर घर भेजा जा रहा है। वही कई मरीज तो एसएमएस अस्पताल के हालात देखकर वापस लौट जाते हैं।
आज से घर पर नहीं देखेंगे सरकारी डॉक्टर
निजी अस्पतालों की ओर से राइट टू हेल्थ बिल का विरोध किया जा रहा है। अब इस बिल में अरिश्दा सहित कई अन्य चिकित्सक संगठन भी शामिल हो गए हैं। अरिश्दा के अध्यक्ष डॉ अजय चौधरी ने कहा कि हम हमेशा डॉक्टरों के हित की लड़ाई लड़ते हैं। उन्होंने अपील की है कि सभी सरकारी डॉक्टर अस्पताल में ड्यूटी करने के बाद घर जाकर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करें। शुक्रवार से सभी सरकारी डॉक्टर पर मरीजों को नहीं देखें। इसके चलते माना जा रहा है कि आज से सभी सरकारी चिकित्सक अस्पताल के बाद घर पर मरीजों को नहीं देखेंगे। जिसकी वजह से मरीजों के लिए परेशानियां और ज्यादा बढ़ सकती है। क्योंकि सरकारी अस्पतालों में पहले ही मरीजों की भीड़ बहुत ज्यादा लगी हुई है और अब घर पर भी जब डॉक्टर मरीजों को नहीं देखेंगे तो हालात भयावह होंगे।
आज महिला चिकित्सक निकलेगी आक्रोश रैली..
डॉक्टरों की ओर से राइट टू हेल्थ बिल का विरोध किया जा रहा है। महिला चिकित्सकों की ओर से आज राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोश रैली निकाली जाएगी। सुबह 10 बजे महिला चिकित्सक जेएमए सभागार में एकत्रित होगी। उसके बाद भारी संख्या में महिला चिकित्सक रैली निकालेगी। इससे पहले गुरुवार शाम को डॉक्टरों की ओर से कैंडल मार्च निकाला गया था।
पी एच एन एस के सचिव डॉ विजय कपूर ने कहा है कि अब निजी अस्पताल पीछे नहीं हटेंगे। निजी अस्पतालों की ओर से लंबे समय से राइट टू हेल्थ बिल को निरस्त करने की मांग की जा रही थी। लेकिन राज्य सरकार ने बिल को पारित कर दिया है। सरकार ने चुनावी साल को देखते हुए बिल को पारित किया है। इस बिल से ना तो मरीजों को कोई लाभ है और ना ही अस्पतालों को कोई लाभ है। इस बिल की वजह से चिकित्सा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। ऐसे में इस बिल को सरकार को निरस्त करना पड़ेगा। जब तक यह बिल निरस्त नहीं होगा। प्रदेश के ढाई हजार से ज्यादा सभी निजी अस्पताल बंद रहेंगे। हम नहीं चाहते कि मरीजों को कोई परेशानी हो। लेकिन सरकार अपनी हठधर्मिता पकड़ी हुई है। जिसकी वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
Updated on:
24 Mar 2023 10:27 pm
Published on:
24 Mar 2023 10:52 am
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