मार्च 2014 में सुजानगढ़ में दामाद को जलाकर मारने के मामले में न्यायालय ने नगर परिषद सुजानगढ़ को आरोपितों की संपति कुर्क करने के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सुजानगढ ने नगर परिषद आयुक्त को आदेश दिए कि प्रकरण में आरोपित वार्ड पांच निवासी खेमचंद के खिलाफ कार्रवाई लंबित है। खेमचंद की दुकान के विक्रय विलेख के अनुसार संपति में आरोपित खेमचंद का हिस्सा है। इसलिए परिषद इस दुकान को कुर्क कर रिपोर्ट आगामी पेशी 18 फरवरी 2016 या इससे पहले न्यायालय में पेश करे।
यह था मामला
सरदारशहर निवासी रिंकेश का ससुराल सुजानगढ़ था। रिंकेश की पत्नी मायके आई हुई थी। 16 मार्च 2014 को रिंकेश पत्नी को लेने ससुराल सुजानगढ़ आया। रिंकेश के दादा ससुर कालूराम, दादी सास गीता, चाचा ससुर रामगोपाल व खेमचंद ने रिंकेश के साथ मारपीट की। पेट्रोल डालकर उसके आग लगा दी। झुलसे रिंकेश को राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया।
चिकित्सकों ने उसे बीकानेर रेफर कर दिया। झुलसे रिंकेश के एसीजेएम, बीकानेर ने बयान दर्ज किए। रिंकेश ने बयान में ससुराल पक्ष के लोगों पर पेट्रोल डालकर जलाने की बात बताई। जबकि पुलिस की ओर से दर्ज बयान अलग थे। 23 मार्च को रिंकेश की मौत हो गई।
सुजानगढ़ पुलिस ने रिंकेश के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच के बाद एफआर लगा दी। एफआर से खफा मृतक के पिता सत्यनारायण माली ने न्यायालय में गुहार लगाई। न्यायालय ने प्रसंज्ञान लेते हुए 25 जून 2015 को एफआर अस्वीकार कर चारों आरोपितों को न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए।
न्यायालय में पेश नहीं होने पर चारों आरोपितों को भगोड़ा घोषित कर दिया। रामगोपाल व खेमचंद बाहर चले गए। कालूराम व गीता सुजानगढ़ में है। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया है।