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जयपुर
राजस्थान के उदयपुर में दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति है। पूरे राजस्थान मंे आज शाम तक इंटरनेट बंद कर दिया है और अगले एक महीने तक प्रदेश भर में धारा 144 लागू कर दी गई है। राजस्थान में इस साल छह महीनों में ही कई बार हिंसा हो चुकी है और लगभग हर बार साम्प्रदायिक हिंसा का रुप लिया है। पिछले आठ सालों के दौरान राजस्थान में तीन हजार से भी ज्यादा बार हिंसा हुई है और इस हिंसा में अरबों रुपयों की सम्पत्ति नष्ट कर दी गई है।
तीन साल में साम्प्रदायिक हिंसा की पांच प्रमुख बड़ी घटनाएं
1 8 अक्टूबर 2019 को टोंक जिले में दशहरा का जुलूस निकाला जा रहा था। कुछ उपद्रवियों ने मालपुरा कस्बे में जुलूस में शामिल लोगों पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद हिंसा भड़क गई। हालात काबू में करने के लिए प्रशासन ने इंटरनेट सेवा बंद कर कर्फ्यू लगाया। साथ ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए टोंक और जयपुर से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर शहर में तैनात किया गया।
2 बारां में 11 अप्रैल 2021 को दो युवकों की हत्या हुई। इसका आरोप दूसरे समुदाय के लोगों पर लगा। इसके बाद हिंसा भड़क गई। हालात काबू में करने के लिए पुलिस ने इंटरनेट बंद कर कर्फ्यू लगा दिया। हिंसक भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
3 19 जुलाई 2021 को झालावाड़ में दो समुदाय के युवाओं के बीच किसी बात पर विवाद हो गया। इसके कुछ देर बाद यहां हिंसा भड़क गई। घरों, दुकानों और बाइकों में आगजनी और तोड़फोड़ की जाने लगी। बल प्रयोग कर पुलिस ने लोगों को काबू किया। अफवाहों को रोकने के लिए प्रशासन ने कुछ इलाकों में तीन दिन के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी। इस दौरान हिंसा भड़काने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में पुलिस ने 200 से ज्यादा लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
4 इस साल करौली में दो अप्रेल को हिंदू नव वर्ष पर युवकों ने बाइक रैली निकाली। रैली पर पथराव के बाद हिंसा भड़क गई। उपद्रवियों ने 35 से ज्यादा दुकानों, मकानों और बाइकों को आग के हवाले कर दिया। हालात काबू में करने के लिए प्रशासन ने जिले में कर्फ्यू लगाया और फिर इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी। हिंसा में पुलिसकर्मियों सहित 43 से ज्यादा लोग घायल हुए। इस हिंसा के बाद लगे कर्फ्यू के कारण शहर के लोग करीब 15 दिन तक घरों में कैद रहे थे।
5 इसी साल दो मई 2022 को जोधपुर में परशुराम जयंती पर भी भारी भरकम बवाल हुआ। इस दौरान जालोरी गेट चौराहे पर झंडे लगाए गए। देर रात ईद को लेकर समाज के लोगों ने इसी चौराहे पर झंडे लगाने की कोशिश की। इस दौरान दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। दोनों समुदाय के लोग आमने.सामने आ गए और पत्थरबाजी शुरू हो गई। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागकर कर हालात काबू में किए।
पिछले आठ साल में राज्य में हुए 3300 से ज्यादा दंगे, उपद्रव
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक पिछले आठ साल 2013 से 2020 के दौरान सूबे में 3 हजार 342 दंगे-उपद्रव हुए। इस दौरान 2013 में सबसे ज्यादा 542 दंगे हुए। 2014 में 536 तो 2015 में 424 दंगे हुए। बीते आठ वर्षों में सबसे कम 269 दंगे 2016 में हुए। 2017 में 435, 2018 में 392, 2019 में 349 और 2020 342 दंगे उपद्रव राजस्थान में हुए हैं। 2021 के सांप्रदायिक दंगों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। इन आठ वर्षों में हुए दंगों में 3, 547 लोग पीड़ित हुए हैं।
सात साल में कितने सांप्रदायिक दंगे हुए,
उपद्रव और दंगों के बीच राजस्थान में हुए साम्प्रदायिक दंगों और तनाव की बात की जाए तो सात साल के दौरान राजस्थान में 81 बार साम्प्रदायिक दंगे हुए हैं। साल 2014 से लेकर साल 2020 के दौरान ये साम्प्रदायिक दंगे हुए है। सबसे ज्यादा दंगे 2014 में हुए। इनकी संख्या एक साल के दौरान 26 रही। उसके बाद साल 2015 में 16 बार, 2016 में शून्य बार, 2017 में 16 बार, 2018 में 18 बार, 2019 में 18 और साल 2020 में 3 बाद साम्प्रदायिक दंगे हुए। इनमें 225 से भी ज्यादा लोग गंभीर रुपए से घायल हुए। मामूली घायलों की संख्या भी सैंकडों में रही। वहीं सम्पत्ति के नुकसान की भी बड़ी खबरें आई। सरकारी सम्पत्ति को बहुत नुकसान पहुचंाया गया।
Published on:
30 Jun 2022 01:02 pm
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