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हर साल जा रही 10 हजार की जान, सरकार नहीं ला सकी रोड सेफ्टी बिल

आधा दर्जन राज्यों में बिल लगभग तैयार...

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Jaipur News

जयपुर . राजस्थान में हर साल करीब 10 हजार लोगों की जान सड़क हादसों में जा रही है। देशभर में हादसों में 50 फीसदी कमी लाने के प्रयासों के तहत राज्य सरकार ने सख्त कानून बनाने के लिए वर्ष 2015-16 के बजट में रोड सेफ्टी बिल लाने की घोषणा की थी।

इससे पहले सुराज संकल्प पत्र में भी इसे शामिल किया गया था। राज्य सरकार वादे के तहत समय पर बिल लाती तो राजस्थान देश में केरल के बाद दूसरा राज्य होता। अब तक गुजरात सहित देश के पांच राज्य केरल, कर्नाटक, आसाम, नागालैण्ड रोडसेफ्टी बिल ला चुके हैं। आधा दर्जन राज्यों में बिल लगभग तैयार हो चुके हैं लेकिन राजस्थान में रोड सेफ्टी बिल के मामले में परिवहन विभाग सुस्ती बरत रहा है।

जनवरी-फरवरी में हादसों में कई की मौत

सड़क सुरक्षा नियमों की सख्ती से पालना कराने और रोड इंजीनियरिंग के नियमों पर विशेष फोकस करने को लेकर रोड सेफ्टी बिल लाया जाना है। सभी राज्य इस पर तेजी से काम कर रहे हैं। पड़ोसी राज्य गुजरात में पिछले साल हादसों में करीब 10 फीसदी कमी आई है। देश में यह आंकड़ा 3 फीसदी के आसपास है लेकिन राजस्थान में पिछले साल मात्र 21 मौतें कम हुई, जो एक फीसदी भी नहीं है। चालू वर्ष के जनवरी-फरवरी में ही राजस्थान में बड़ी संख्या में सड़क हादसों में लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद बिल के प्रति सुस्ती बरती जा रही है। परिवहन विभाग के स्तर पर सिर्फ सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ गठित है, जिसे सड़क हादसे रोकने में बड़ी कामयाबी नहीं मिली है।

नहीं शुरू हो सकी मोबाइल वैन

सूत्रों के मुताबिक गुजरात के साथ ही यूपी में सड़क हादसों को देखते हुए मोबाइल वैन लगाई हैं, प्रदेश में नहीं लग पाई हैं। राज्य सरकार ने दो साल पहले संभागों पर मोबाइल वैन लगाने की घोषणा की थी। उधर गुजरात सरकार 100 और मोबाइल वैन लगाने की तैयारी में है।

राजस्थान में 2014 से बिल ठंडे बस्ते में
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2013 में सुराज संकल्प पत्र में बिल लाने का प्रावधान शामिल था। सरकार ने 2014 में सार्वजनिक निर्माण विभाग से यह बिल तैयार कराया। बाद में इसे परिवहन विभाग को सौंप दिया गया। इसी आधार पर वर्ष 2015-16 के बजट में बिल लाना प्रस्तावित था लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इसे ठण्डे बस्ते में डाल दिया।

बिल आया तो ऐसे होगा काम

रोड सेफ्टी अथॉरिटी एक्ट लाया गया तो पुलिस, परिवहन, सार्वजनिक, नगरीय निकाय, चिकित्सा, शिक्षा सहित करीब दर्जनभर विभाग शामिल होंगे। इन विभागों की ओर से सड़क सुरक्षा को लेकर किसी भी काम में लापरवाही बरते जाने पर कड़े जुर्माने व कानूनी सजा के प्रावधान किए जा सकते हैं। गुजरात सरकार ने बिल में सड़क सुरक्षा आयुक्त को मुखिया बनाया है। इसमें रोड सेफ्टी एक्ट से जुड़े विभाग के अधिकारी के कहना नहीं मानने पर 500 से 10 हजार रुपए तक व्यक्तिगत रूप से प्रतिदिन का जुर्माना लगाए जाने का भी प्रावधान किया गया है।

शैलेन्द्र कुमार अग्रवाल, प्रमुख सचिव एवं परिवहन आयुक्त ने कहा की केंद्र सरकार रोड सेफ्टी अथॉरिटी बिल ला रही है। इसलिए राज्य सरकार इस पर काम नहीं कर रही है। केन्द्र का बिल आने के बाद बिल तैयार करेंगे, ताकि नियमों में विरोधाभास न हो।