
जयपुर।
राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य के तौर पर रिटायर्ड कर्नल केसरी सिंह की हालिया नियुक्ति का विवाद गर्माया हुआ है। नौबत तो यहां तक आई हुई है कि मुख्यमंत्री तक को इस नियुक्ति के फैसले को सार्वजनिक रूप से दुर्भाग्यपूर्ण बताना पड़ गया है। इधर इस विवादित नियुक्ति मामले को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में कई तरह की चर्चाएं और अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं।
उठने लगे कई सवाल
आरपीएससी सदस्य की विवादित नियुक्ति पर सीएम गहलोत का बड़ा बयान सामने आने के बाद कई सवाल उठने शुरू हो गए हैं। जैसे कर्नल केसरी सिंह की नियुक्ति किस 'राह' से होकर गुज़री है? आखिर किस मंत्री-विधायक-सलाहकार की सिफारिश के बाद ये नियुक्ति हुई है? सवाल ये भी कि सीएम गहलोत के इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताये जाने के बाद अब क्या होगा? क्या कर्नल केसरी को एक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हटाया जाता है? या क्या कर्नल केसरी सिंह खुद नैतिकता के आधार पर पद से हटते हैं? ये तमाम सवाल ऐसे हैं जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बने।
समर्थक और विरोधी आमने-सामने
कर्नल केसरी सिंह के आरपीएससी सदस्य नियुक्ति मामले में सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त बहस हो रही है। समर्थक और विरोधी अपनी-अपनी दलीलों के साथ एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। एक धड़ा जहां से केसरी सिंह को वंचित और गरीब वर्ग का हितैषी और आवाज़ बुलंद करने वाली शख्सियत बताते हुए नियुक्ति को सही बता रहा है, वहीं दूसरा धड़ा उनके पूर्व में दिए गए बयानों को समाज विशेष के लोगों को भड़काऊ बताते हुए नियुक्ति का विरोध भी कर रहा है।
सीएम गहलोत का ये आया है बड़ा बयान
सीएम गहलोत ने आरपीएससी सदस्य कर्नल केसरी सिंह के वायरल हुए पुराने बयानों के वीडियो पर चिंता ज़ाहिर की है। शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि जो व्यक्ति 22 साल आर्मी में रहा हो उससे इस तरह के बयानों की उम्मीद नहीं थी। नियुक्ति की यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना मुझसे हो गई।
उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आर्मी बैकग्राउंड के लोगों को अध्यक्ष और सदस्य बनाए जाने के हमने प्रयास शुरू किए, ये भी उसी का हिस्सा रहा। गहलोत ने कहा कि वे केसरी सिंह से सिर्फ एक बार मिले हैं। वो उनके पास मकराना से टिकट मांगने आए थे, न तो कभी उन्होंने मुझसे आरपीएससी सदस्य बनने की मांग की थी और नहीं किसी ने उनके नाम की सिफारिश की थी। हमारी सरकार ने सोचा कि अभ्यर्थियों को नुकसान नहीं हो। इसके लिए आर्मी बैकग्राउंड के कई लोगों के आवेदन आए हुए थे। उनके नाम की सिफारिश राज्यपाल को कर दी। मुझे भी थोड़ा लालच आ गया था कि मैं अपनी मकराना की सीट क्यों खराब करूं। इसके लिए उनके नाम की सिफारिश कर दी थी।
सदस्य बनने के बाद मुझसे मिलने भी नहीं आए
गहलोत कहा कि केसरी सिंह के बयानों के जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, उनसे बहुत धक्का लगा है। 22 साल तक आर्मी में रहने वाला व्यक्ति इस तरह की सोच का हो सकता है। वे अब आरपीएससी सदस्य बन गए हैं। मैंने चाहा था कि मैं उनको को बुलाकर बात करूं, लेकिन वो मुझसे सदस्य बनने के बाद मिलने भी नहीं आए।
आचार संहिता से ऐन पहले नियुक्ति
गहलोत सरकार ने चुनाव घोषणा और आचार संहिता लगने से ऐन पहले राजस्थान लोक सेवा आयोग में तीन सदस्यों की नियुक्ति की। इनमें से एक नाम सेना से रिटायर्ड कर्नल केसरी सिंह का नाम शामिल रहा। इसके ठीक बाद सोशल मीडिया पर केसरी सिंह के कुछ पुराने वीडियो वायरल होने लगे जिसके बाद कुछ सामाजिक संगठनों और अन्य लोगों ने उनके नाम और नियुक्ति पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इन पुराने वीडियो में केसरी सिंह एक समाज के युवाओं को संबोधित करते दिख रहे थे।
विरोध में ये भी दलीलें
नागौर में जाट समन्वय समिति ने जिला कलक्टर को मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में रिटायर्ड कर्नल केसरी सिंह के नाम पर आपत्ति दर्ज करवाई है। वायरल वीडियो को आधार मानकर सिंह के विचारों को सामाजिक परिप्रेक्ष्य में पूरी तरह से असंगत बताया गया है। कहा गया कि ऐसी वैचारिक पृष्ठभूमि एवं रुग्ण मानसिकता वाले व्यक्ति से राजस्थान लोक सेवा आयोग सरीखी संवैधानिक संस्था में प्रशासनिक अधिकारियों के चयन में निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। इसलिए तत्काल प्रभाव से इस विवादित नियुक्ति को निरस्त किया जाए।
कर्नल केसरी सिंह का 'विरोधियों' को ये जवाब
पुराने वीडियो वायरल होने से बढ़े विवाद के बीच आरपीएससी के नवनियुक्त सदस्य केसरी सिंह ने विरोधियों को जवाब भी दिया। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, ''मैं 21 वर्ष तक भारतीय सेना में देश सेवा दी और अलग-अलग जगह कार्य करते हुए अपना सर्वस्व देश के लिए दिया। 21 वर्ष तक देश सेवा के पश्चात मैंने समाज सेवा के क्षेत्र में आने का निर्णय लिया। इस दौरान कई सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुआ और इन कार्यक्रमों के अनुरूप ही मैं वहां बैठे युवाओं को प्रेरित करने के लिए संवाद किया। आज मुझे राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य के रूप में एक संवैधानिक पद पर नियुक्ति दी गई है। इस संवैधानिक पद पर कार्य करने के लिए बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान ही मेरा एकमात्र गाइडिंग प्रिंसिपल होगा। सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में मेरे द्वारा किए गए संवाद तत्समय की परिस्थितियों के अनुरूप थे। अब मेरा गाइडिंग प्रिंसिपल केवल भारत का संविधान होगा। भारतीय सेवा द्वारा मुझे सिखाए गए देश सेवा, ईमानदारी और निष्पक्षता के गुणों का पालन करते हुए मैं अपना कार्य करूंगा। एक सैनिक के रूप में मेरा कोई जाति धर्म नहीं रहा है और अब इस संवैधानिक पद पर भी मेरा कोई जाति धर्म नहीं होगा। मेरे किसी भी पुराने वक्तव्य को अन्यथा ना लें।
Published on:
14 Oct 2023 12:17 pm
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