
जयपुर . शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश देने के मामले में मनमानी का मामला सामने आया है। आरटीई के तहत आरक्षित वर्ग के गरीब बच्चों के बजाए कई निजी स्कूल अपने चहेतों के बच्चों को नि:शुल्क सीटों पर प्रवेश दे रहे हैं। लॉटरी में नंबर आने व पूरे दस्तावेज जमा कराने के बाद भी कई निजी स्कूल गरीबों बच्चों को गुमराह कर रहे हैं। उनकी जगह रैंकिंग में नीचे रहे बच्चों को प्रवेश दिए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग में इसकी शिकायत करने पर भी कोई कारवाई नहीं हो रहे है।
यह है बानगी
- केस 01 : प्रतापनगर निवासी मुकेशकुमार बंजारा ने बेटी संजना के आरटीई में प्रवेश के लिए कई स्कूलों में आवेदन किए। वार्ड के एक नामी निजी स्कूल में संजना को सूची में पहली प्राथमिकता मिली। मगर सभी दस्तावेज जमा कराने के बावजूद प्रवेश नहीं दिया गया। अब अभिभावक बेटी के एडमिशन के लिए परेशान हो रहे हैं।
- केस 02 : पांच्यावाला निवासी पूनम सेन ने 5 वर्षीय बेटी साक्षी के लिए आरटीई के तहत आवेदन भरा। उसी वार्ड के एक निजी स्कूल में बेटी को दूसरी प्राथमिकता मिली। संबंधित सभी दस्तावेज जमा कराने के बावजूद स्कूल ने बच्ची के बजाय उसके भाई-बहनों का दाखिल कराने का दबाव डाला। बात नहीं बनी तो आधी फीस देने को कहा। फिर कह दिया कि अभी प्रवेश नहीं हुआ है, बाद में देखेंगे। अब पूनम उलझन में है कि बेटी का दाखिला अन्य स्कूल में कराए या नहीं।
इधर इसलिए नहीं हो रहे प्रवेश
कई जगह प्रक्रिया के दौरान खामियां छोड़ने के कारण भी कई अभिभावक मायूस हो रहे हैं। कहीं ऑनलाइन आवेदन के समय निवास स्थान का वार्ड गलत चुन लिया तो कहीं अन्य खामी छोड़ दी। ऐसे में बच्चों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा।
करेंगे कार्रवाई
कई जगह अभिभावकों से खामियां छूट रही हैं। स्कूल पात्र और चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं तो यह गलत है। इस पर कार्रवाई की जाएगी।
- रतनसिंह यादव, जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक प्रथम)
Published on:
14 Apr 2018 09:48 am
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