
Rudrabhishek Ka Mahatva , Rudrabhishek Ki Vidhi
जयपुर.
भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका रुद्राभिषेक करना है। शिव को ही रुद्र कहा जाता है, ऋग्वेज, सामवेद और यजुर्वेद में रुद्राभिषेक का महत्व बताया गया है। सावन माह में रुद्राभिषेक का महत्व बढ जाता है। सावन में सोमवार का दिन इसके लिए खास भी माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार रुद्राभिषेक से कई लाभ होते है। जीवन में सुख और शांति की इच्छापूर्ति के लिए जल से रुद्राभिषेक किया जाता है। वंश वृद्धि के लिए घी से अभिषेक करना चाहिए। शत्रु नाश के लिए सरसों के तेल से अभिषेक करने का विधान बताया गया है। पापों से मुक्ति के लिए शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करना चाहिए। मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए गाय के दुग्ध से, ज्वर ठीक करने के लिए गंगाजल से, गंभीर रोग और दुःख से छुटकारा पाने के लिए कुशा जल से अभिषेक करना चाहिए। मकान, वाहन या पशु आदि की इच्छा पूर्ति के लिए दही से, लक्ष्मी प्राप्ति और कर्ज से छुटकारा पाने के लिए गन्ने के रस से अभिषेक किया जाता है। धन में वृद्धि के लिए जल में शहद डालकर अभिषेक करना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि सावन शुक्ल पक्ष की द्वितीया और नवमी के दिन शिवजी, माता गौरी के साथ होते हैं इसलिए इस दिन रुद्राभिषेक करना हर तरह से श्रेष्ठ और लाभकारी होता है। इसके साथ ही शुक्ल पक्ष की द्वितीया, पंचमी, षष्ठी, नवमी, द्याद्यशी और त्रयोदशी तिथि में अभिषेक करने से सुख समृद्धि, ऐश्वर्य व संतान प्राप्ति होती है। संयोग से आज सावन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि ही है। आज विधिपूर्वक रुद्राभिषेक कर शिवजी के समक्ष अपने मनोरथ व्यक्त करें, उनके आशीर्वाद से इच्छाएं जल्द ही पूर्ण होंगी।
Published on:
28 Jul 2020 10:35 am
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