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Rajasthan Politics : ‘अगर वो मुझे कहीं मिल गए तो…’,  BJP प्रभारी के ‘बहरूपिया’ और ‘दोनों टांगे’ वाले बयान पर सचिन पायलट का ‘पलटवार’, जानें क्या बोले? 

भाजपा प्रभारी राधा मोहन अग्रवाल के 'बहुरूपिया' और 'दो टांगों' वाले विवादित बयान पर सचिन पायलट ने करारा लेकिन मर्यादित पलटवार किया है।

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Radha Mohan Das Agrawal and Sachin Pilot - File PIC

Radha Mohan Das Agrawal and Sachin Pilot - File PIC

राजस्थान की सियासत में इन दिनों जुबानी जंग अपने चरम पर है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल द्वारा कांग्रेस के कद्दावर नेता सचिन पायलट पर किए गए 'निजी हमले' ने प्रदेश का राजनीतिक पारा गरमा दिया है। अग्रवाल के 'बहुरूपिया' और 'दो नावों की सवारी' वाले बयान पर अब खुद सचिन पायलट ने चुप्पी तोड़ी है। मीडिया से मुखातिब होते हुए पायलट ने जिस अंदाज में जवाब दिया, उसने न केवल भाजपा प्रभारी को 'शिष्टाचार' का पाठ पढ़ाया, बल्कि यह भी संकेत दे दिया कि वे इन हमलों से विचलित होने वाले नहीं हैं।

'मिलेंगे तो पूछूंगा- इतना विशेष प्रेम क्यों?'

पायलट से जब भाजपा प्रभारी के बयानों पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "अग्रवाल जी से पहले कभी मेरी मुलाक़ात नहीं हुई। पता नहीं वे मुझसे इतना 'विशेष प्रेम' क्यों रखते हैं? अगर वे मुझे कहीं मिल गए, तो मैं उनसे जरूर पूछूंगा कि आखिर बात क्या है?"पायलट ने स्पष्ट किया कि संगठन का काम करना और अपनी बात रखना ठीक है, लेकिन राजनीति में मर्यादा का होना अनिवार्य है।

'विरोधियों को कम आंकना बड़ी भूल'

सचिन पायलट ने बिना नाम लिए भाजपा के रणनीतिकारों को बड़ी सीख दी। उन्होंने कहा:

  • मर्यादा और स्तर: राजनीति में टीका-टिप्पणी का एक स्तर होना चाहिए। कीचड़ उछालने से किसी का भला नहीं होता।
  • सम्मान की राजनीति: विरोधियों को कभी कम नहीं आंकना चाहिए। लोकतंत्र में विरोधियों को सम्मान देना ही एक परिपक्व राजनेता की पहचान है।
  • मुद्दे बनाम व्यक्ति: राजनीति सैद्धांतिक, वैचारिक और मुद्दों पर आधारित होनी चाहिए। जो लोग मुद्दों पर चलते हैं, वही लंबे समय तक जनता के दिलों में जगह बना पाते हैं।

गहलोत के 'बचाव' के बाद अब खुद पायलट फ्रंट फुट पर

दिलचस्प बात यह है कि कल ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी पायलट का बचाव करते हुए कहा था कि "पायलट की दोनों टांगें अब कांग्रेस में ही हैं।" अब खुद पायलट ने मोर्चा संभालते हुए यह साफ कर दिया है कि भाजपा के निजी हमले उनके लिए 'विशेष प्रेम' से ज्यादा कुछ नहीं हैं।

राजस्थान कांग्रेस में अब जिस तरह से एक-दूसरे का बचाव किया जा रहा है, वह भाजपा के लिए आने वाले उपचुनावों और राजनीतिक समीकरणों में चुनौती खड़ा कर सकता है।

क्या है विवाद की जड़?

दरअसल, भाजपा प्रभारी राधा मोहन अग्रवाल ने पायलट के टोंक विधायक होने और उनकी राजनीतिक स्थिति पर तंज कसते हुए उन्हें 'बहुरूपिया' कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि पायलट का एक पैर कहाँ रहता है, यह किसी को नहीं पता।

मीडिया रिपोर्ट्स और वहां मौजूद सूत्रों के अनुसार, उनके भाषण के शब्दशः मुख्य अंश यहाँ दिए गए हैं:

'बहुरूपिया' और 'बाहरी' होने का बयान

"बड़ी हैरानी की बात है... टोंक में आज एक 'बहुरूपिया' (Imposter) विधायक बन गया है। वह न तो टोंक का निवासी है और टोंक तो छोड़िए, वह आपके राज्य राजस्थान का भी निवासी नहीं है। क्या आप यह जानते हैं? वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।"

'उत्तर प्रदेश' से तुलना और भगोड़ा शब्द का प्रयोग

"मैं भी उत्तर प्रदेश से आता हूँ और राजस्थान का प्रभारी हूँ, लेकिन मैं यहाँ विधायक बनने का सपना भी नहीं देख सकता। मैं उत्तर प्रदेश से भागा हुआ नेता नहीं हूँ; मैं यूपी का एक मजबूत नेता हूँ। आपने यहाँ कैसी परंपरा शुरू कर दी है? आप किसी भी राज्य से भेजे गए व्यक्ति को स्वीकार कर लेते हैं और उसे माला पहना देते हैं।"

'दोनों टांगें' और वफादारी पर सवाल

"उसकी वफादारी किसके प्रति है? न अपनी पार्टी के प्रति, न अपने मुख्यमंत्री के प्रति और न ही अपने कार्यकर्ताओं के प्रति। मुझे समझ नहीं आता कि आपने उसे विधायक कैसे बनने दिया। उनकी 'एक टांग कांग्रेस में रहती है और दूसरी टांग पता नहीं कहाँ रहती है'