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काले कानून के खिलाफ सचिन पायलट ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका- एक बार फिर गरमाई प्रदेश की राजनीति

गुरुवार को सचिन पयालट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर लोकसेवकों को बचाने वाले इस बिल को रद्द करने की मांग की।

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जयपुर

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Punit Kumar

Oct 26, 2017

Congress Leader Sachin Pilot

लोकसेवकों को संरक्षण देने और मीडिया पर पाबंदी लगाने वाले राजस्थान सरकार के विवादित बिल को लेकर प्रदेश की राजनीति ने एक नया रुप ले लिया है। जहां सड़को से लेकर सोशल मीडिया और आवाम तक इस बिल का विरोध काफी तेज हो गया है। मामला इतना गरमा गया है कि इसे लेकर प्रदेश सरकार बैकफुट पर घिरती नजर आ रही है। तो वहीं इस विवादित दंड विधि राजस्थान संशोधन अध्यादेश 2017 को लेकर तीन याचिकाएं भी दायर हो चुकी हैं। जबकि इस मामले को लेकर विपक्ष पहले सी सत्ता दल को कोई मौका नहीं देता चाहता है। अब पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलेट ने बिल के विरोध में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जहां उन्होंने इसके खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर इसे खारिज करने की मांग की है।

इससे पहले कांग्रेस नेता सचिन पायलट साफ कर चुके थें, कि बिल को प्रवर समिति के पास भेजने का कोई मतबल नहीं है और ना ही इससे कोई नतीजा निकलने वाला है, लिहाजा राजस्थान सरकार इस विवादित बिल को वापस ले ले, नहीं प्रदेश कांग्रेस इसके खिलाफ विरोध के साथ-साथ कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाने के लिए तैयार है। इसके बाद गुरुवार को सचिन पयालट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर लोकसेवकों को बचाने वाले इस क्रिमिनल लॉज (राजस्थान अमेंडमेंट) बिल 2017 को रद्द करने की गुहार लगाई है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस बिल को राज्य सरकार भ्रष्ट लोकसेवकों को संरक्षण देने के लिए लेकर आई है, जिसे बिना देरी के रद्द कर देना चाहिए।

गौरतलब है कि इससे पहले विधानसभा के सत्र के दौरान राज्य सरकार को इस बिल को लेकर चौतरफा विरोध का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस बिल को प्रवर समिति के पास भेज दिया, जिस पर पुनर्विचार के बाद इसे आगामी सत्र में लाया जाएगा। तो वहीं इसके विरोध में विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने खिलाफत करते हुए इसे काला कानून की संज्ञा दी थी। जिसे लेकर सरकार की खूब किरकिरी भी हुई।

जानें क्या है इस बिल में...

इस बिल के मंसौदे के मुताबिक, प्रदेश के सांसद, विधायक, जज और अफसरों के खिलाफ जांच करना काफी मुश्किल हो जाएगा, जबकि इन लोगों पर पर शिकायत दर्ज कराना आसान नहीं रहेगा। इसके अलावा दागी लोकसेवकों को दुष्कर्म पीडि़ता वाली धारा में संरक्षण, कोर्ट के प्रसंज्ञान लेने से पहले नाम-पता उजागर तो दो साल सजा, अभियोजन स्वीकृति से पहले मीडि़या में किसी तरह की कोई रिपोर्ट आई तो इसमें सजा का प्रवधान के साथ कड़ा जुर्माना भी है। जबकि इन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए सरकार 180 दिन में अपना निर्णय देगी। इसके बाद भी अगर संबंधित अधिकारी या लोकसेवक के खिलाफ कोई निर्णय नहीं आता है, तो अदालत के जरिए इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई जा सकेगी।

आपको बता दें कि पूरे प्रदेश भर इस विवादित बिल को लेकर अब तक चार जनहित याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल हो चुकी है। जबकि इसके खिलाफ विरोध अब काफी गहराता जा रहा है, जहां सरकार हर मोर्चे पर घिरती नजर आ रही है। जबकि चुनावी मौसम को देखते विपक्ष इस विवादित बिल के जरिए जनता का समर्थन से राज्य सरकार को नाकाम करने की कोशिश में जुटी हुई है।

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