
हुब्बल्ली में चातुर्मास के लिए विराजित आचार्य दिव्येशचन्द्र सागर सूरि ने ‘राजमहल से झोपड़ी की ओर’ विषय पर शिविर एवं धर्मसभा को संबोधित किया। सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में उन्होंने सामायिक के महत्व को समझाते हुए कहा कि करोड़ों रुपए खर्च करने पर भी एक सामायिक नहीं खरीदी जा सकती, जबकि एक सामायिक के प्रत्याख्यान से दीर्घकालीन देवत्व सुख की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। Bसामायिक आत्मसंयम और मोक्ष का मार्गB आचार्य ने कहा कि आत्मा को उसके स्वभाव की ओर ले जाने वाला योग सामायिक है। विचारों में मैत्रीभाव, आत्मसंयम और अहिंसा जैसे भावों को विकसित करने से सामायिक की साधना सार्थक होती है। देशविरति से सर्वविरति की ओर बढऩे का प्रवेशद्वार सामायिक है। यह साधु जीवन के आंतरिक आनंद का आधार और मोक्ष की ओर ले जाने वाला राजमार्ग है। उन्होंने कहा कि सामायिक से कषायों का क्षय, विषयों का संयम, दुष्प्रवृत्तियों का त्याग तथा शुक्लध्यान और मोक्ष की दिशा में प्रगति होती है। तीर्थंकर परमात्मा के अनुसार समता, समाधि और सिद्धि की संपदा प्रदान करने वाली साधना ही सामायिक है। Bचार प्रकार की सामायिक B आचार्य ने शास्त्रों में वर्णित चार प्रकार की सामायिक—सम्यक्त्व सामायिक, श्रुत सामायिक, देशविरति सामायिक और सर्वविरति सामायिक की व्याख्या की। उन्होंने श्रोत्रिय महाराजा और पुणिया श्रावक के उदाहरणों के माध्यम से सामायिक की महत्ता को विस्तार से समझाया।
Updated on:
03 Sept 2026 05:52 pm
Published on:
27 Aug 2026 06:01 am
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