
बस कंडक्टर का बेटा, जिसने देश में बनाए 237 ऑफिस, दो लाख लोगों से की 935 करोड़ की ठगी, पढ़े विक्रम के काले कारनामे
मुकेश शर्मा / जयपुर। एसओजी ( SOG ) में नव सृजित आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी ( Sanjivani Credit Cooperative Society ) से जुड़े 30 हजार पन्नों के दस्तावेजों को खंगाला, तब जाकर प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह को गिरफ्तार किया गया। आरोपी प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह ने वर्ष 2014 में अपने पद से इस्तिफा दे दिया था। जबकि एसओजी को मार्च 2019 में संजीवनी सोसायटी के खिलाफ शिकायत मिली। इसके बाद एसओजी के अनुसंधान अधिकारी सत्यपाल मिढा और हैड कांस्टेबल प्रमोद त्यागी व कांस्टेबल संगीत कुमार की टीम ने 30 हजार पन्नों के दस्तावेज खंगाले और आरोपी के खिलाफ सबूत जुटाए।
संजीवनी की पड़ताल में सामने आया है कि इसका चेयरमैन विक्रम सिंह बस कंडक्टर का बेटा है। विक्रम ने करीब 1000 करोड़ रुपए कीमत की संजीवनी सोसायटी को खड़ा किया। आरोपी विक्रम सिंह ने एक अखबार भी खोला और उसके उद्घाटन पर कई मंत्रियों को बुलाया था। आरोपी की कई वीवीआइपी लोगों के साथ भी फोटो है।
'आदर्श' को आदर्श मान बनाई खुद की सोसायटी
एसओजी सूत्रों के मुताबिक, करीब 20 लाख निवेशकों की रकम हड़पने वाली आदर्श क्रेडिट सोसायटी को देख आरोपी विक्रम सिंह ने संजीवनी सोसायटी का वर्ष 2008 में गठन किया। वर्ष 2010 में सोसायटी को मल्टीस्टेट बनाया और इसका कार्य क्षेत्र राजस्थान के साथ गुजरात तक बढ़ा लिया।
237 शाखाएं खोल 953 करोड़ की ठगी
एडीजी पालीवाल ने बताया कि संजीवनी क्रेडिट को ऑपरेटिव सोसायटी ने राजस्थान में 211 शाखाओं एवं गुजरात की 26 शाखाओं सहित भारत के 2 राज्यों में 237 शाखाएं खोलीं। सोसायटी ने राजस्थान के करीब 1 लाख 46 हजार 991 निवेशकों सहित 953 करोड रुपए से अधिक निवेश राशि की ठगी की है। सोसायटी की लेखा पुस्तकों में करीब 1100 करोड़ रुपए के ऋण र्दिशत किए गए हैं, उनमें अधिकांश बोगस ग्राहक हैं। ऐसे बोगस ऋणों की संख्या करीब 56 हजार है और औसत ऋण प्रति व्यक्ति करीब 2 लाख रुपए है।
बैंक से रुपए लेकर आने वाले को बनाया निदेशक
आरोपी विक्रम सिंह के लिए जो कर्मचारी बैंक से रुपए निकलवाकर लाता था। वर्तमान में उसी कर्मचारी को सोसायटी में निदेशक बना रखा है। वर्तमान में करीब एक दर्जन लोग सोसायटी में पदाधिकारी है। इन सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।
विदेश भागने की शंका पर एसओजी ने रखा राज
एसओजी ने संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के खिलाफ 23 अगस्त को ही मामला दर्ज कर लिया था। लेकिन मामला दर्ज होने की भनक लगने पर आरोपी विक्रम सिंह के विदेश भागने की शंका पर इसे राज ही रखा। दूसरी तरफ एसओजी अधिकारी संजीवनी के खिलाफ जल्द मामला दर्ज करने की बात कहते रहे। एसओजी सूत्रों के मुताबिक, आरोपी विक्रम सिंह ने विदेशों में भी अपनी सम्पत्ति बना रखी है। इसके चलते वह विदेश में जाकर बैठ जाता तो उसे यहां लाना बड़ा मुश्किल होता।
Published on:
18 Sept 2019 07:45 am
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