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Makar Sankranti 2021 इस बार सिंह पर सवार होकर आ रही संक्रांति, जानें इसका हम पर क्या पड़ेगा प्रभाव

नए साल का पहला महापर्व अब नजदीक आ गया है। सन 2021 में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। सूर्य के राशि परिवर्तन को सूर्य संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो इसे मकर सक्रांति कहते हैं। इस दिन को पर्व के रूप में मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार इस बार सूर्य 14 जनवरी को सुबह से ही मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा जिसके कारण दिनभर संक्रांति का पुण्यकाल बना रहेगा।

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Sankranti Kab Hai Makar Sankranti Date Puja Vidhi Snan Shubh Muhurat

Sankranti Kab Hai Makar Sankranti Date Puja Vidhi Snan Shubh Muhurat

जयपुर. नए साल का पहला महापर्व अब नजदीक आ गया है। सन 2021 में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। सूर्य के राशि परिवर्तन को सूर्य संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो इसे मकर सक्रांति कहते हैं। इस दिन को पर्व के रूप में मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार इस बार सूर्य 14 जनवरी को सुबह से ही मकर राशि में प्रवेश कर जाएगा जिसके कारण दिनभर संक्रांति का पुण्यकाल बना रहेगा। मकर संक्रांति का दिन स्नान, दान के साथ ही सूर्यपूजा के लिए भी सबसे अहम दिन माना जाता है।

इस पर्व पर तिल और गुड़ का सेवन करने और दान देने का विधान है। यही कारण है कि मकर संक्रांति पर आज भी घरों में प्रायः तिल और गुड़ के लडडू बनाए जाते हैं। इस दिन दान देने का सर्वाधिक महत्व है। सनातन धर्मग्रंथों के अनुसार मकर सक्रांति पर स्नान और पूजा-पाठ के बाद श्रद्धा अनुसार दान देने का बाकायदा संकल्प लेना चाहिए। फिर जरूरतमंद लोगों को यथोचित दान करना चाहिए। मान्यता है कि मकर सक्रांति पर दिया गया दान सहस्र गुना होकर वापस लौटता है।

संक्रांति के संबंध में एक खास बात यह है कि इसे अब देवी का रूप दे दिया गया हैै हालांकि पौराणिक ग्रंथों में ऐसा उल्लेख नहीं मिलता। ज्योतिषाचार्य पंडित एमकुमार शर्मा के मुताबिक इस बार की संक्रांति हाथ में भुशुंडि शस्त्र लिए सिंह पर सवार होकर आ रहीं हैं। हाथी इनका उपवाहन है। इस संक्रांति का नाम मंद है जोकि देव जाति की हैं और ये वैश्य के घर में प्रवेश करेंगी। इन्होंने सफेद रंग के कपड़े पहने हैं और गले में पुन्नाग के फूलों का हार धारण किया है। ये स्वर्ण पात्र में भोजन करती हैं। इससे संक्रांति की शुभता बढ़ गई हैं।

मकर संक्रांति पर्व पर सूर्याेपासना बहुत फलदायी होती है इसलिए सूर्यदेव की विधिविधान से पूजा जरूर करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पंडित जीके मिश्र बताते हैं कि इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान के बाद सूर्य को जल अर्पित करें। सूर्य को अर्घ्य देने अर्थात जल चढ़ाते समय गायत्री मंत्र का जाप करें। हो सके तो सूर्य नमस्कार करें। इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र अथवा आदित्य हृदयम का तीन बार पाठ अवश्य करें। यह पाठ बहुत उत्तम और त्वरित फल देता है। इस पाठ से सूर्यदेव की प्रसन्नता से राजकीय अनुग्रह या मान-सम्मान प्राप्त होता है।