
Dr Satish Poonia - File PIC
राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, नवनिर्वाचित राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी और कठिन परीक्षा की शुरुआत हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने 24 घंटे के भीतर दोहरी जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें पंजाब राज्य का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। वर्तमान समय में 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास महज 2 विधायक हैं, जबकि राज्य में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (AAP) 94 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत में है। ऐसे में राजस्थान के झुंझुनूं जिले से ताल्लुक रखने वाले और हरियाणा में पार्टी को लगातार तीसरी बार सत्ता दिलाने वाले रणनीतिकार सतीश पूनिया के सामने पंजाब के राजनीतिक किले को फतह करने की एक पेचीदा और ऐतिहासिक चुनौती आ खड़ी हुई है।
बता दें कि भाजपा ने पहले ही यह आधिकारिक ऐलान कर दिया है कि वह वर्ष 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। शिरोमणि अकाली दल (SAD) से गठबंधन टूटने के बाद ग्रामीण पंजाब और सिख बहुल इलाकों में संगठन का आधार खड़ा करना सतीश पूनिया के लिए प्राथमिक लक्ष्य होगा।
पंजाब विधानसभा में वर्तमान में पार्टियों की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
आम आदमी पार्टी: 94 सीटें (बहुमत का आंकड़ा 59 है)
कांग्रेस : 16 सीटें (मुख्य विपक्षी दल)
शिरोमणि अकाली दल : 3 सीटें
भारतीय जनता पार्टी : 2 सीटें
बहुजन समाज पार्टी: 1 सीट
निर्दलीय: 1 सीट
पंजाब में भाजपा के सामने चुनौती सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि शहरी पार्टी की छवि से बाहर निकलकर पूरे प्रदेश में एक मजबूत विकल्प के तौर पर खुद को स्थापित करना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सतीश पूनिया 2027 के चुनाव में भाजपा को 2 सीट से खींचकर 15 से 20 से अधिक सीटों के आंकड़े तक पहुंचा देते हैं, तो इसे पंजाब के राजनीतिक इतिहास में भाजपा का सबसे बड़ा संगठनात्मक ब्रेकथ्रू माना जाएगा।
गौरतलब है कि सतीश पूनिया को पंजाब जैसी कठिन और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने के पीछे उनका हालिया हरियाणा का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। मार्च 2024 में उन्हें हरियाणा लोकसभा चुनाव का प्रभारी बनाया गया था, जिसके बाद जुलाई 2024 में उन्हें हरियाणा का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया।
एंटी-इंकमबेंसी को मात: किसान आंदोलन, पहलवानों के विरोध प्रदर्शन और जाट समुदाय की कथित नाराजगी की खबरों के बावजूद सतीश पूनिया की रणनीति के दम पर भाजपा ने हरियाणा में 48 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।
सीटों में इजाफा: 2019 की 40 सीटों की तुलना में 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटें बढ़कर 48 हो गईं। इस जीत का मुख्य श्रेय पूनिया द्वारा जाट वोट बैंक और गैर-जाट वोटों के बीच साधे गए बारीक संतुलन को दिया गया।
दिल्ली में 5/5 का स्ट्राइक रेट : पंजाब से पहले सतीश पूनिया का अन्य राज्यों में चुनावी प्रबंधन का रिकॉर्ड काफी प्रभावी रहा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव (2025) पूनिया को नजफगढ़ जिले की 5 विधानसभा सीटों- नजफगढ़, विकासपुरी, उत्तम नगर, मटियाला और द्वारका का चुनाव प्रबंधन सौंपा गया था। पूनिया के रणनीति प्रबंधन के दम पर पार्टी ने इन सभी 5 की 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
राजस्थान में 4 साल तक प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पूनिया ने बूथ स्तर और पन्ना प्रमुख स्तर तक संगठन का विस्तार किया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा-आरएलपी गठबंधन ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसने 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की वापसी की मजबूत जमीन तैयार की थी।
पंजाब की राजनीति राजस्थान और हरियाणा से काफी भिन्न है। सतीश पूनिया के सामने पंजाब में काम करते हुए मुख्य रूप से 5 मोर्चों पर काम करना होगा।
बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करना: पंजाब के 117 विधानसभा क्षेत्रों के गांवों तक भाजपा के कार्यकर्ताओं की मजबूत टीम तैयार करना।
किसान मुद्दों पर स्वीकार्यता बढ़ाना: कृषि प्रधान राज्य पंजाब में किसानों के बीच भाजपा के प्रति विश्वास बहाल करना।
सिख-जाट राजनीतिक समीकरण: राज्य की जनसांख्यिकी को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण और पंथिक मतदाताओं को पार्टी से जोड़ना।
त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय मुकाबला: आप, कांग्रेस और अकाली दल के बीच बिखरे वोटों का फायदा उठाकर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाना।
संभावित राजनीतिक गठजोड़: आवश्यकता पड़ने पर राज्य के स्थानीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक फैसले लेना।
राजस्थान के जाट समाज से आने वाले डॉ. सतीश पूनिया के इस नए पंजाब असाइनमेंट पर अब पूरे देश के राजनीतिक पंडितों की निगाहें टिकी हुई हैं।
Updated on:
18 Aug 2026, 1:53 PM IST
Published on:
18 Aug 2026, 1:53 PM IST
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