
Vasundhara Raje and Satish Poonia with Nitin Nabin - File PIC
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम घोषित कर दी। नई कार्यकारिणी में राजस्थान का प्रतिनिधित्व पहले के मुकाबले अधिक प्रभावी रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए रखा गया है, जबकि राज्यसभा सदस्य सतीश पूनिया को राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर उनका संगठनात्मक कद बढ़ाया गया है। राजस्थान मूल के सुनील बंसल भी राष्ट्रीय महामंत्री के पद पर बरकरार हैं। इसके अलावा राजेश मंगल को राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष और सांसद डॉ. मन्नालाल रावत को एसटी मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है।
इस लिहाज से भाजपा के केंद्रीय संगठन में राजस्थान से सीधे चार (राजस्थान से जुड़े पांच) प्रमुख चेहरे महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। खास यह है कि राजस्थान में अगले ढाई साल में विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार होगी और उससे पहले निकाय व पंचायत चुनाव होने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में राजस्थान के इन नेताओं की भूमिका राज्य की राजनीति पर भी असर डाल सकती है।
वसुंधरा राजे - राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
सतीश पूनिया - राष्ट्रीय महामंत्री
सुनील बंसल - राष्ट्रीय महामंत्री
राजेश मंगल - राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष
मन्नालाल रावत - एसटी मोर्चा अध्यक्ष
वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाये रखना बड़ा राजनीतिक संदेश है। राजे 2019 से इस पद पर हैं और 2023 में भी उन्हें इसी पद पर बरकरार रखा गया था। उस समय पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रखते हुए राजस्थान में चुनावी भूमिका को अलग तरीके से तय किया था।
वहीं, पूनिया की पदोन्नति महत्वपूर्ण है। पूनिया 2019 से 2023 तक राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष रहे। इसके बाद उन्हें हरियाणा का प्रभारी बनाया गया। हाल ही पार्टी ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा। पूनिया का राष्ट्रीय महामंत्री बनना राजस्थान की राजनीति में इसलिए भी अहम है क्योंकि वे पार्टी के प्रमुख जाट चेहरों में हैं।
2023 की राष्ट्रीय टीम में राजस्थान से अलका सिंह गुर्जर राष्ट्रीय सचिव थीं। नई टीम में राजे और बंसल की जिम्मेदारी बरकरार है, लेकिन अलका गुर्जर बाहर हैं। हालांकि इसे राजनीतिक तौर पर उन्हें हटाया जाना भर नहीं माना जा सकता। जून 2026 में भाजपा ने उन्हें भी राजस्थान से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया था। यानी राष्ट्रीय सचिव का संगठनात्मक पद भले खत्म हुआ, लेकिन उन्हें संसद के जरिए केंद्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान मिला है।
उदयपुर से सांसद डॉ. मन्नालाल रावत को भाजपा ने एसटी मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। दक्षिण राजस्थान में भाजपा के लिए आदिवासी वोट बैंक रणनीतिक महत्व रखता है। आदिवासी बहुल उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और आसपास के इलाकों में भाजपा के संगठनात्मक विस्तार के लिए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण होगी। राजस्थान की सीमा से सटे मध्य प्रदेश और गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों पर भी नजर रखी जाएगी। अभी इस क्षेत्र में भारत आदिवासी पार्टी का दबदबा है।
सुनील बंसल राजस्थान में जन्मे और राजस्थान विश्वविद्यालय से एबीवीपी की राजनीति शुरू करने के बाद उन्होंने यूपी में संगठन को मजबूत किया। 2022 से राष्ट्रीय महामंत्री हैं। संगठन में उनका अनुभव व चुनावी रणनीति की विशेषज्ञता राजस्थान के लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि इनकी नियुक्ति दिल्ली कोटे से हुई है।
राजस्थान से राजेश मंगल को राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। यह पद सीधे चुनावी राजनीति से ज्यादा संगठन के वित्तीय और संसाधन प्रबंधन से जुड़ा है। इससे राजस्थान के कारोबारी और आर्थिक नेटवर्क को केंद्रीय संगठन में प्रतिनिधित्व मिलने का संकेत भी माना जा सकता है।
Updated on:
18 Aug 2026 09:37 am
Published on:
18 Aug 2026 09:37 am
