
राजीव पचौरी
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में घोटाले दर घोटाले सामने आ रहे हैं। इसकी बानगी हाल ही देखने को मिली है। एक निजी अस्पताल ने 150 रुपए के जैल की कीमत 14 हजार रुपए उठाई है। वहीं एक बिल में एक ही बार में 10 हजार टैबलेट दे दी गईं। एक अस्पताल ने तो हद पार करते हुए करीब 21 टैबलेट्स के पत्ते का करीब तीन लाख रुपए का बिल उठाया है। जबकि बाजार में यह टैबलेट्स करीब 800 रुपए में उपलब्ध हैं।
आरजीएचएस के सतर्कता दल की जांच में सामने आया है कि जिले के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर प्रतिदिन 25 लाख रुपए की दवा खा रहे हैं। सवाल उठने पर सरकार ने कुछ मेडिकल स्टोर्स का पैसा रोक दिया और बड़ी राशि के बिल की दवा लेने वाले कर्मचारियों को नोटिस भी थमाए, लेकिन अब भी यह खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अनुचित लाभ लेने की बंदरबांट में निजी अस्पताल संचालकों के साथ सरकारी चिकित्सक और कर्मचारी भी शामिल हो गए हैं।
सतर्कता दल की जांच में पहले खुलासा हुआ था कि आरजीएचएस में 50-50 का खेल चल रहा है। कर्मचारी और मेडिकल स्टोर्स आधे-आधे पैसे हजम कर रहे हैं। चिकित्सकों को दवा लिखने की घर पर फीस दी जा रही है। कर्मचारी इस राशि से घर का सामान ले रहे हैं, जबकि आधी राशि मेडिकल स्टोर्स वाले हजम कर रहे हैं। खास बात यह है कि चिकित्सक एवं मेडिकल स्टोर्स के बिल भी धड़ाधड़ पास हो रहे हैं।
इन तीन मामलों से समझें घोटाले की बानगी
21 टैबलेट का बिल 3 लाख से ज्यादा
जिंदल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में रूपेन्द्र सिंह का आरजीएचएस के जरिए इलाज किया गया। मरीज को रीफास्टॉप-400 (रीफाक्सिमिन- 400 एमजी) की दवा दी गई। बिल में इसकी एमआरपी 3,25,389 रुपए, जबकि टैबलेट्स की क्वांटिटी 21 दिखाई गई है। जबकि बाजार में इस एक टेबलेट की कीमत 30 से 40 रुपए है। इस मरीज का पूरा बिल 6 लाख 2 हजार 163 रुपए 40 पैसे है। यह बिल पास भी हो गया। यह दवा डॉ. रवि भारद्वाज ने लिखी है।
50 ग्राम जैल की कीमत 90 गुना
राजकीय आरबीएम हॉस्पिटल में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. योगेश अग्रवाल ने हाल ही में सुनीता नाम की मरीज का आरजीएचएस योजना के तहत उपचार किया। इस मरीज ने शहर के सक्षम मेडिकल्स से दवा ली। इसमें एक जैल दिया गया, जिसकी कीमत 14,255 रुपए दर्शाई गई है। खास बात यह है कि बाजार में जैल की कीमत महज 150 रुपए के करीब है। डीएफओ नाम का यह जैल 50 ग्राम का है।
एक साथ लिख दी 10 हजार टैबलेट्स
शहर के अरोड़ा हॉस्पिटल ने आरजीएचएस के जरिए मरीज कमलेश का उपचार किया। यहां डॉ. युवराज अरोड़ा ने मरीज को कुछ टैबलेट्स लिखी। खामियों का आलम यह है कि मरीज को 10 हजार 946 टैबलेट्स एक साथ लिखी गई हैं। बिल में इसकी कीमत 1 लाख 84 हजार रुपए से अधिक की दर्शाई है। इस मरीज का कुल बिल 2 लाख 6 हजार 778 रुपए का है, जिसका सरकार के स्तर पर भुगतान हो चुका है।
खामियों के बावजूद हो रहा भुगतान
आरजीएचएस में हो रहे घोटाले में कुछ रसूखदार भी जुड़े हुए हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिलों में तमाम खामियां होने के बाद भी यह बिल जयपुर स्तर पर पास हो रहे हैं और निजी अस्पताल और मेडिकल स्टोर्स का भुगतान बिना रोक-टोक हो रहा है। निजी अस्पताल संचालक एवं मेडिकल स्टोर्स वाले सांठ-गांठ कर मनमर्जी के बिलों को पास करा मनचाही राशि उठा रहे हैं।
निरीक्षण में मिलीं थी अनियमितता
अगस्त माह में आरजीएचएस के संयुक्त परियोजना निदेशक सुरेशचंद मीणा के नेतृत्व में टीम ने भरतपुर शहर में निरीक्षण किया। यहां निजी हॉस्पिटल में हड्डी रोग चिकित्सक के 99 पर्चे मिले थे। यहां ज्यादातर मरीजों को एक ही इंजेक्शन लगने की बात सामने आई थी। टीम को एक मेडिकल स्टोर पर चिकित्सक के पर्चे मिले। एक सरकारी चिकित्सक दो-दो क्लिनिक चलाते भी मिले।
भुगतान रुकवाया है
मैं इनको दिखवाता हूं। वैसे इस तरह के ज्यादातर मामलों में भुगतान रोका गया है। फिर भी मैं अपने स्तर पर इस मामले को देखूंगा।सुरेश मीणा, संयुक्त परियोजना निदेशक, आरजीएचएस जयपुर
Published on:
30 Oct 2022 01:31 pm
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