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पंजीयन व मुद्रांक विभाग में घोटाला: विभाग ने रजिस्ट्री करवाने वाले आम लोगों को ही बताया घोटालेबाज

Registry Scam in Rajasthan: मकान व जमीन की रजिस्ट्री करवाने में आम लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगाई तो किसी ने बैंक से लोन लेकर रजिस्ट्री करवाई। लेकिन, उनकी कमाई का ऐसा घोटाला हुआ कि अब जनता को ही दोषी बना दिया गया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
जयपुर। Registry Scam in Rajasthan: मकान व जमीन की रजिस्ट्री करवाने में आम लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगाई तो किसी ने बैंक से लोन लेकर रजिस्ट्री करवाई। लेकिन, उनकी कमाई का ऐसा घोटाला हुआ कि अब जनता को ही दोषी बना दिया गया। पंजीयन व मुद्रांक विभाग की ओर से स्टाम्प विक्रेताओं और रजिस्ट्री करवाने वाले लोगों को नोटिस भेजे गए। उन नोटिसों में गलती नहीं बल्कि कूटरचित साजिश लोगों की ही बताई गई है। जिन्हें नोटिस मिले हैं, उनका कहना है कि उन्होंने पूरे पैसे ई-ग्रास के माध्यम से जमा करवाए हैं। उनके पास सब रजिस्ट्रार की हस्ताक्षर की हुई रसीद है फिर कूटरचित साजिश उनकी कैसे हुई? लोगों का कहना है कि जिंदगी भर की कमाई जमीन खरीदने और रजिस्ट्री करवाने में लगा दी। अब सरकार कह रही है कि उनके पास पैसा नहीं पहुंचा। हमने तो डीड राइटर के पास ही काम करवाया था। अब वह व्यक्ति भी नहीं मिल रहा।

सब रजिस्ट्रर व डीआइजी ऑफिस जा रहे लोग, नहीं हो रही सुनवाई
नोटिस लेकर लोग सब रजिस्ट्रार व डीआइजी ऑफिस जा रहे हैं मगर उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उन्हें केवल एक ही बात कही जा रही है कि वे रकम जमा करवाएं। मूल राशि और ब्याज दोनों जमा करवाना जरूरी है। लोगों का कहना है कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। मगर कोई सुनने वाला नहीं है। पुलिस में एफआइआर दर्ज करवाई है। वहां भी मामला आगे नहीं बढ़ा। इधर, नोटिस की तय मियाद खत्म होती जा रही है।

लोग यों हो रहे परेशान
सांगानेर निवासी सीताराम यादव (40) ने बताया कि पिछले साल दिसम्बर माह में डेढ़ बीघा जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी। पांच लाख 28 हजार का चालान कटवाया था। रजिस्ट्री करवाकर सब रजिस्ट्रार की रसीद भी ली थी। अब नोटिस आया है कि साढ़े 13 हजार ही जमा है, पांच लाख चौदह हजार और जमा करवाए। हमने कलक्ट्रेट में अर्जुन चौधरी से चालान कटवाया था। वह व्यक्ति मिल नहीं रहा है, अब दुबारा पैसा कहां से जमा करवाएं।

इधर, विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों पर कब होगी कार्रवाई?
इस पूरे प्रकरण में डीड राइटर व अन्य जितने जिम्मेदार हैं, उससे अधिक जिम्मेदारी पंजीयन विभाग के सब रजिस्ट्रार व अधीनस्थ कर्मचारियों की है। रजिस्ट्री करने से पहले ई-चालान के नंबर को क्यों नहीं देखा गया कि क्या उससे पूरा पैसा सरकार के खाते में जमा हुआ या नहीं? बगैर सरकार के खाते में राशि देखे केवल डीड राइटर्स के कहने पर रजिस्ट्री कैसे कर दी गई। यह भी संभावना है कि यह पूरा खेल विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की मिलीभगत से ही हुआ हो। विभाग लोगों को नोटिस भेजकर कार्रवाई की बात कहकर धमका रहा है, मगर अपने कर्मचारियों और डीड राइटर्स पर कार्रवाई कब की जाएगी?