जयपुर। द्वितीय श्रेणी पेपर लीक मामले को लेकर सरकार इस समय विपक्ष के निशाने पर है। भाजपा के राज्यसभा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने इस पूरे मामले के लिए आरपीएससी और एसओजी की मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने राज्य सरकार से फिर यह मांग दोहराई है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। ऐसा नहीं होने पर मीणा ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाने और गांधीवादी तरीके से आंदोलन की चेतावनी दी है। मीणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि पेपर लीक में कांग्रेस सरकार के 3 मंत्री और 5 विधायक भी शामिल हैं। इसमें दो मंत्री मुख्यमंत्री के खासमखा हैं, इसलिए सरकार निष्पक्ष जांच नहीं करवा पा रही है। इस बार पेपर लीक हुए उसमें दो दर्जन से ज्यादा बसों का इस्तेमाल किया गया। बसों में अलग-अलग जिलों में पेपर देकर अभ्यर्थियों को भेजा गया। इसकी जांच होनी चाहिए। किरोड़ी ने दावा किया है कि बसों के माध्यम से 3 हजार विद्यार्थियों को पेपर सॉल्व करवाया गया है।
ED की एंट्री के दिए संकेत
किरोड़ी लाल मीणा ने मामले में ईडी की एंट्री के भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही ठंड कम होगी, राजस्थान में ईडी की कार्रवाई देखने को मिलेगी। मनी लॉन्ड्रिंग के कई मामले हैं जिन मामलों में ईडी को शिकायत दी गई है। ईडी ने प्रारंभिक जांच अपने स्तर पर कर ली है अब जल्दी उसका एक्शन भी देखने को मिलेगा।
16 परीक्षाओं के पेपर लीक, 10 की परीक्षा हुई निरस्त
मीणा ने कहा कि इस सरकार में 16 प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। सरकार ने 10 परीक्षाएं निरस्त कर दी हैं। यह सब आरपीएससी की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने 15 दिन पहले ही अध्यापक भर्ती परीक्षा का पेपर मुख्य सरगना सुरेश ढाका और उसके दोस्त भूपेंद्र को मिला था, इसकी जानकारी 15 दिन पहले ही ज्ञापन के जरिये RPSC देकर जांच की मांग भी की थी। मगर चेयरमैन ने यह कहा था गोपनीय शाखा पेपर को हैंडल नहीं करती है। यह उनका गुमराह करने वाला बयान है। किरोड़ी ने कहा कि RPSC से पेपर लीक हुआ है और चेयरमैन को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।