
जयपुर। राजधानी में उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। जिला उपभोक्ता आयोग क्रम-2 ने एक गैस एजेंसी द्वारा ग्राहक का बुक किया हुआ सिलेंडर किसी अन्य व्यक्ति को बेचने को 'सेवा दोष' और 'अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस' माना है। इस लापरवाही के लिए आयोग ने जयपुर के मुरलीपुरा स्थित सीमा भारत गैस एजेंसी पर 4000 रुपए का हर्जाना लगाया है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष जी.एल. मीणा, सदस्य अजय कुमार और सुप्रिया अग्रवाल की खंडपीठ ने घनश्याम दास विजय द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए दिया।
मामले के अनुसार, परिवादी घनश्याम दास विजय सीमा भारत गैस एजेंसी के नियमित ग्राहक हैं। विवाद की शुरुआत 1 दिसंबर 2021 को हुई। जब परिवादी के मोबाइल पर अचानक एक मैसेज आया कि उनका गैस सिलेंडर डिलीवर कर दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह थी कि परिवादी ने उस समय कोई सिलेंडर बुक ही नहीं कराया था। जब उन्होंने इस विसंगति के बारे में गैस एजेंसी से संपर्क कर स्पष्टीकरण मांगा, तो एजेंसी के कर्मचारियों ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और मामले को टाल दिया।
कुछ दिनों बाद 5 दिसंबर को जब परिवादी को वास्तव में सिलेंडर की जरूरत पड़ी, तो उन्होंने नियमानुसार बुकिंग कराई। 7 दिसंबर को जब सिलेंडर की डिलीवरी हुई, तो उसके साथ मिली रसीद ने एजेंसी की धांधली उजागर कर दी। रसीद के अनुसार, उस वित्तीय वर्ष में परिवादी को अब तक कुल 4 सिलेंडर डिलीवर किए जा चुके थे, जबकि हकीकत में उन्हें केवल 3 सिलेंडर ही प्राप्त हुए थे। इससे स्पष्ट हो गया कि 1 दिसंबर को परिवादी के नाम पर बुक हुआ सिलेंडर एजेंसी ने गुपचुप तरीके से किसी और को बेच दिया था।
अपने बचाव में गैस एजेंसी ने उपभोक्ता आयोग के समक्ष एक अजीबोगरीब दलील पेश की। एजेंसी ने कहा कि चूंकि उपभोक्ता को साल में 15 सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलती है और उन्होंने अभी तक उस सीमा को पार नहीं किया है, इसलिए उन्हें कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। एजेंसी ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की। हालांकि आयोग ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
जिला उपभोक्ता आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि ग्राहक की जानकारी के बिना उसके कोटे का सिलेंडर किसी अन्य को बेचना सीधे तौर पर 'अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस' की श्रेणी में आता है। आयोग ने कहा कि यह न केवल सेवा में कमी है, बल्कि उपभोक्ता के विश्वास के साथ खिलवाड़ भी है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए गैस एजेंसी को आदेश दिया कि वह परिवादी को हुई मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में 4000 रुपए का भुगतान करे। यह फैसला उन गैस एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है जो उपभोक्ताओं के रिकॉर्ड में हेरफेर कर कालाबाजारी को बढ़ावा देते हैं।
Published on:
08 Apr 2026 11:06 am
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