
साथ जिएंगे-साथ मरेंगे के वादे अक्सर फिल्मों में सुने जाते हैं, लेकिन पाली जिले के तखतगढ़ कस्बे में दोस्ती की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। यहां दशकों पुरानी दो सहेलियों ने अपनी अटूट दोस्ती को मौत के बाद भी कायम रखा। एक सहेली के निधन के महज 5 घंटे के भीतर ही दूसरी सहेली ने भी सदमे में दम तोड़ दिया। रविवार को गोगरा रोड स्थित श्मशान घाट में दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।
तखतगढ़ के नागचौक इलाके में रहने वाली जेठी बाई पत्नी मालाराम कलबी और उनकी पड़ोसन भीकीबाई पत्नी भूराराम कलबी के बीच बचपन से ही गहरी दोस्ती थी। मोहल्ले के लोग बताते हैं कि दोनों अक्सर हंसी-मजाक में कहती थी, हममें से जो भी पहले जाए, वह दूसरी को भी साथ लेकर ही जाए। नियति ने इस बात को सच कर दिखाया। 4 अप्रैल की रात जेठी बाई का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। 5 अप्रैल की सुबह जैसे ही यह खबर भीकीबाई तक पहुंची, वे गहरा सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकीं और कुछ ही घंटों में उन्होंने भी प्राण त्याग दिए।
दोपहर में जब दोनों सहेलियों की अर्थियां एक साथ उठी तो पूरे कस्बे में मातम छा गया। परिवारों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि जब दोनों जीवन भर साथ रही तो उनकी विदाई भी एक साथ ही होनी चाहिए। सैकड़ों नम आंखों के बीच दोनों सहेलियों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। श्मशान घाट में मौजूद हर शख्स इस दुर्लभ संयोग और अटूट प्रेम को देखकर भावुक था।
यह अद्भुत संयोग केवल इन दो महिलाओं तक सीमित नहीं था। उनके पति स्व. मालाराम और स्व. भूराराम भी आपस में पक्के दोस्त थे। दोनों सहेलियों का पीहर भी जालोर जिले के आहोर क्षेत्र में था, जिससे उनका रिश्ता और भी गहरा था। भीकीबाई के पुत्र हंसाराम ने बताया कि उनकी मां अपनी सहेली के जाने का दुख सह नहीं पाई।
Updated on:
6 Apr 2026, 12:19 PM IST
Published on:
6 Apr 2026, 12:12 PM IST
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