सरकार ने एक अप्रेल से देश में सोने के जेवर की खरीद और बिक्री के नियमों में बड़ा बदलाव किया है।
सरकार ने एक अप्रेल से देश में सोने के जेवर की खरीद और बिक्री के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस फैसले से जहां लोगों में खुशी है वहीं, एक चिंता यह भी सता रही है कि घर में रखे सोने को भविष्य में बेचने में दिक्कत हो सकती है। हॉलमार्क को अनिवार्य करने के बाद अब जेवर की खरीद और बिक्री इसके बिना करना मुश्किल हो गया है। जयपुर सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मित्तल का कहना है कि जिन लोगों के पास पुराने गहने हैं जिन पर हॉलमार्क नहीं बना है उसे अब खरीदने और बेचने में काफी मुश्किलें आ रही है। देश में लोग आज से नहीं बल्कि वर्षों से सोना खरीदने को शुभ मानते हैं और यहीं कारण है की देश के हर घर में गृहणिनियों के पास आपको कुछ ग्राम सोना जरूर मिल जाएगा। आकड़ों की मानें तो दुनिया में बड़े देशों के पास जितना सोना नहीं है, उससे ज्यादा सोना भारतीय महिलाओं के पास है।
पुराने गहने को बेचने में हो सकती है मुश्किल
मित्तल ने कहा कि सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन गहनों पर पड़ेगा, जो पुराने हो चुके हैं। दरअसल, हॉलमार्किंग अनिवार्य करने के बाद बिना हॉलमार्क वाले जेवर को आप कहीं भी खरीद या बेच नहीं सकते। इस फैसले के बाद उन लोगों के ज्यादा दिक्कत हो सकती है, जिनके पास बिना हॉलमार्क वाले गहने हैं।
हॉलमार्क से क्या फायदा
दरअसल, हॉलमार्क वाले गहनों पर भारतीय मानक ब्यूरो का लोगो लगा होता है, जिसपर यह भी जानकारी दी गई होती है की वो सोने की ज्वेलरी कितने कैरेट की है। 24 कैरेट वाले सोने को सबसे शुद्ध माना जाता है, जिसका मतलब की इस गहने में किसी भी प्रकार की मिलावट ना के बराबर है और इसी वजह से ऐसे सोने की किमत मंहगी होती है। देश में सामान्य तौर पर लोग 18 से 22 कैरेट का सोने के बनाते है।