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मोदी सरकार इस कानून में करने जा रही है ये बड़ा बदलाव, अगर अब किया ऐसा तो हो सकती है जेल

मोदी सरकार लाने जा रही है विशेष कानून, अगर अब किया ऐसा तो हो सकती है जेल  

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जयपुर

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rohit sharma

May 12, 2018

modi

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जयपुर।

राजस्थान समेत पूरे देश में बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मोदी सरकार अब माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए बने कानून में बदलाव लाने जा रही है। समाज में बुजुर्गों के साथ बढ़ते दुर्व्यवहार के बाद सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय ने केंद्र में इस बात की सिफारिश की है की बुजुर्ग माता-पिता के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार और माता-पिता को घर से बाहर निकालने पर छह महीने की सजा दी जाएगी।

कानून में पहले 3 माह की सजा का प्रावधान था जिसे अब 6 महीने तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और कल्याण कानून,2018 का नया कानून तैयार हो रहा है। इस कानून में 6 महीने की सजा का प्रावधान रखा गया है। यदि कोई भी व्यक्ति अपने माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करता है या उन्हें घर से बहार निकल देता है तो वे कानून की शरण ले सकते हैं।

नए कानून में हो रहे है ये बदलाव

माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और कल्याण कानून, 2018 में सजा की सीमा बढ़ाने के साथ-साथ और भी नए बदलाव हुए है। नए कानून में सिफारिश के मुताबिक बच्चों की परिभाषा में भी बदलाव किया है। अब सौतेले बच्चों, दामाद, बहुओं, पोते - पोतियों, नाती-नातिनों और ऐसे नाबालिगों को भी शामिल करने की सिफारिश की गयी है जिनका प्रतिनिधित्व कानूनी अभिभावक करते हैं। साथ ही 10 हजार रुपए के मासिक भत्ते को भी समाप्त कर क़ानूनी कार्रवाई का आदेश है।

वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 कानून में सिर्फ सगे बच्चे और पोते-पोतियां को ही शामिल किया गया है। अगर 2018 का नया कानून लागू हो जाता है तो सौतेले बच्चे, दामाद, बहु को भी शामिल किया जाएगा और इनके द्वारा बुजुर्ग माता-पिता के साथ किए गए दुर्व्यवहार की शिकायत पर सजा का प्रावधान भी है।

अभी तक वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 देता है सुरक्षा

बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार से सुरक्षा के लिए वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 एक कानून भी है यह कानून माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल सुरक्षा करने का दायित्व शामिल है। बुजुर्गों के प्रति बढ़ती असुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने वर्ष 2007 में देश के वृद्ध व्‍यक्तियों के सामने आने वाली असुरक्षा का उत्तर देने के लिए वरिष्ठ नागरिक अधिनियम लागू किया है। सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल के रूप में यह अधिनियम माता पिता के रखरखाव का प्रमुख दायित्‍व उनके बच्‍चों, पोते पोतियों या उनके रिश्‍तेदारों को देता है, जो संभवत: वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति का अधिग्रहण करेंगे। यह राज्‍य को निर्धन तथा बेसहारा वृद्ध व्‍यक्तियों के लिए सुविधाएं प्रदान करने का दायित्‍व भी देता है।

ये हैं वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 के प्रावधान

- ऐसे माता पिता जो अपनी आय अथवा अपनी संपत्ति की आय से अपना खर्च उठाने में असक्षम हैं वे अपने वयस्‍क बच्‍चों से अपने रखरखाव के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस रखरखाव में उचित भोजन, आवास, कपड़े और चिकित्‍सा उपचार का व्‍यय शामिल है।
- माता पिता में जैविक, गोद लिए गए और सौतेले माता पिता शामिल हैं, चाहे वे वरिष्ठ नागरिक हो या नहीं।
- संतानहीन वरिष्ठ नागरिक जो 60 वर्ष या इससे अधिक हैं वे भी अपने रिश्‍तेदारों से रखरखाव का दावा कर सकते हैं, जो उनकी संपत्ति पर कब्‍जा रखते हैं या बाद में इसकी
संभावना है।
- रखरखाव के लिए यह आवेदन वरिष्ठ नागरिक द्वारा स्‍वयं अथवा उसके द्वारा अधिकृत व्‍यक्ति या स्‍वयंसेवी संगठन द्वारा किया जा सकता है। ट्रिब्‍यूनल द्वारा इस पर अपने आप कार्रवाई की जा सकती है।
- ट्रिब्‍यूनल में ये आवेदन प्राप्‍त होने पर बच्‍चों/रिश्‍तेदारों के खिलाफ एक छानबीन या आदेश दिया जा सकता है कि वे अपने माता पिता या वरिष्ठ नागरिकों के रखरखाव के लिए एक अं‍तरिम मासिक भत्ता प्रदान करें।
- यदि ट्रिब्‍यूनल इस बात से संतुष्‍ट है कि बच्‍चों या रिश्‍तेदारों ने अपने माता पिता या वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल से इंकार किया है या इसकी उपेक्षा की है तो वे प्रतिमाह अधिकतम 10,000 रु. की राशि का मासिक रखरखाव भत्ता देने का आदेश देंगे।
- राज्‍य सरकार द्वारा प्रत्‍येक उप संभाग में ऐसे एक या एक से अधिक ट्रिब्‍यूनल की स्‍थापना की आवश्‍यकता होती है। यह प्रत्‍येक जिले में अपीलीय ट्रिब्‍यूनल गठित करेगा जो - ट्रिब्‍यूनल के निर्णय के विरुद्ध वरिष्ठ नागरिकों की अपील की सुनवाई करेगा।
- इस प्रक्रिया के लिए किसी पेशेवर कानूनी व्‍यक्ति की आवश्‍यकता नहीं होगी।
- दोषी व्‍यक्ति को 3 माह की कैद या 5000 रु. का जुर्माना अथवा दोनों का दण्‍ड दिया जा सकता है।
- लाभार्थियों के लिए कम से कम एक वृद्धाश्रम की स्थापना की जाए। इन घरों में वरिष्ठ नागरिकों को न्‍यूनतम सुविधाएं जैसे भोजन, कपड़े और मनोरंजन की गतिविधियां प्रदान की जाए।
- सभी सरकारी अस्‍पतालों या सरकार द्वारा निधिकृत अस्‍पतालों में जहां तक संभव हो वरिष्ठ नागरिकों को बिस्‍तर प्रदान किए जाने चाहिए। चिकित्‍सा सुविधाओं में इनके लिए विशेष कतार की व्‍यवस्‍था भी होनी चाहिए।