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चीतों को जिंदा हिरण और चीतल परोसना कानूनन अपराध, नोटिस भेजा

चीतों को जिंदा हिरण और चीतल परोसने के मामले में एडवोकेट पूनम चंद भंडारी ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय नई दिल्ली के प्रमुख सचिव, वन्य जीव संरक्षण विभाग नई दिल्ली, विधि एवं न्याय विभाग नई दिल्ली, पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इण्डिया नई दिल्ली व राजस्थान के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है।

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चीतों को जिंदा हिरण और चीतल परोसना कानूनन अपराध, नोटिस भेजा

चीतों को जिंदा हिरण और चीतल परोसना कानूनन अपराध, नोटिस भेजा

जयपुर। चीतों को जिंदा हिरण और चीतल परोसने के मामले में एडवोकेट पूनम चंद भंडारी ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय नई दिल्ली के प्रमुख सचिव, वन्य जीव संरक्षण विभाग नई दिल्ली, विधि एवं न्याय विभाग नई दिल्ली, पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इण्डिया नई दिल्ली व राजस्थान के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51ए(छ) के तहत यह नोटिस भेजा गया है।

नोटिस में बताया गया है कि बेजुबान हिरण चीतल को मारना कानूनी अपराध है। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 ए में स्पष्ट रूप से वर्णित किया गया है कि जानवरों व पक्षियों के प्रति करुणा का भाव रखना चाहिए। राजस्थान में विश्नोई समाज पर्यावरण व पशु प्रेमी है और इतिहास इस बात का गवाह है कि पेड़ की रक्षा के लिए 363 विश्नोई समाज के लोगों ने अपने आप को बलिदान कर लिया और हिरणों व चीतलों से उन्हें विशेष प्रेम है और राजस्थान के अलवर जिले से कई हिरण चीतल मध्य प्रदेश के अभ्यारण में जहां आयत्ती चीते रखे हुए हैं। वहां उनके भोजन के लिए भेजा गया है ऐसा समाचार पत्रों से जानकारी मिली है। एडवोकेट भंडारी ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है कि तुरंत इस पर रोक लगाएं और इन वन्यजीवों की रक्षा करें। अन्यथा न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत की जाएगी और फौजदारी मुकदमा भी कराया जाएगा।