
एआई तस्वीर
जयपुर। देशभर में नवरात्रि के अवसर पर मातृ शक्ति की पूजा-अर्चना की जा रही है, वहीं राज्य की पीसीपीएनडीटी टीम ने ‘बेटी बचाओ’ के संकल्प को चरितार्थ करते हुए राजधानी जयपुर में भ्रूण लिंग परीक्षण में लिप्त एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव और अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देशन में पीसीपीएनडीटी डिकॉय टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया और एक अवैध पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन व कार जब्त करने के साथ ही एक चिकित्सक सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला ने बताया कि मुखबिर योजना के तहत सूचना मिली थी कि जयपुर व आसपास के जिलों में कुछ गिरोह पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन से भ्रूण लिंग परीक्षण में लिप्त हैं। सूचना की गहन पड़ताल के बाद एडिशनल एसपी डॉ. हेमंत जाखड़ की निगरानी में सीआई सत्यपाल यादव के नेतृत्व में डिकॉय टीम गठित की गई। टीम ने एक्शन प्लान के अनुसार भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए डॉ. शेरसिंह राजावत से संपर्क साधा।
राजावत ने गर्भवती डिकॉय महिला को केसर चौराहा, सांगानेर स्थित कुबेर हेल्थ केयर में बुलाया। इसी केंद्र पर आरोपी डॉक्टर राजावत ने गर्भवती महिला से भ्रूण लिंग जांच के लिए 80 हजार रुपए लिए और दूसरे आरोपी जगबीर के साथ उसे चौरड़िया पेट्रोल पंप के पास भेजा। यहां तीसरा व मुख्य आरोपी हरी कुमावत मिला, जो अपनी सेंट्रो कार में गर्भवती महिला को मयूर रेजिडेंसी स्थित फ्लैट नंबर 16 में ले गया और पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन से जांच कर गर्भ में लड़की होना बताया।
गर्भवती महिला ने मौका मिलते ही टीम को सूचना दी, जिसके बाद टीम ने फ्लैट पर दबिश दी। वहां चौथी महिला आरोपी शिला देवी भी मिली। उसने पूछताछ में बताया कि आरोपी हरी कुमावत यहां महिलाओं को लाकर भ्रूण लिंग जांच करता है। टीम ने हरी कुमावत (41), शिला देवी (50) और डॉ. शेर सिंह राजावत (48) को गिरफ्तार कर लिया, जबकि आरोपी जगबीर फरार है और उसकी तलाश जारी है। पूछताछ में सामने आया कि डॉ. राजावत गर्भवती महिलाओं को लिंग जांच के लिए प्रेरित करता था।
पीसीपीएनडीटी के परियोजना निदेशक डॉ. राकेश मीणा ने बताया कि मुख्य आरोपी हरी कुमावत आदतन अपराधी है। इसके खिलाफ पहले भी पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत दो एफआईआर दर्ज हैं। इस बार पोर्टेबल मशीन के जरिए वह शातिराना तरीके से भ्रूण लिंग परीक्षण कर रहा था।
पूछताछ में सामने आया कि हरी कुमावत केवल दसवीं पास है और पोर्टेबल मशीन से हजारों रुपए लेकर जांच करता था। महिला आरोपी भी कम पढ़ी-लिखी है, लेकिन नर्सिंग कार्य से जुड़कर महिलाओं को उसके पास भेजती थी। डॉक्टर द्वारा प्रस्तुत डिग्री की भी जांच करवाई जा रही है।
एनएचएम एमडी डॉ. अमित यादव ने बताया कि प्रदेश में भ्रूण लिंग परीक्षण करने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। उन्होंने आमजन से अपील की कि ऐसी गतिविधियों की सूचना देकर बेटियों को बचाने में सहयोग करें।
एएसपी डॉ. जाखड़ ने बताया कि कार्रवाई में नागौर पीसीपीएनडीटी प्रभारी सतेंद्र पालीवाल मुख्य सूत्रधार रहे। वहीं सीआई सत्यपाल यादव, मनीषा शर्मा, बबीता चौधरी, नंदलाल पुनिया सहित कांस्टेबल नरेन्द्र सिंह, ललित नारायण और शानू चौधरी का अहम योगदान रहा।
Updated on:
19 Mar 2026 07:27 pm
Published on:
19 Mar 2026 07:27 pm
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