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MD Smuggler: ड्रग्स की दुनिया का ‘सुपरविलेन’, राजस्थान से गुजरात तक नेटवर्क, 100 करोड़ की कमाई, जादू-टोने में माहिर, पढ़िए पूरी क्राइम कुंडली

Rajuram Vishnoi Arrest: 6 महीने के लंबे ऑपरेशन के बाद एंटी नारकोटिक्स टीम ने 7 साल से फरार एमडी तस्कर राजुराम को गिरफ्तार किया। राजस्थान से गुजरात तक फैले करोड़ों के ड्रग नेटवर्क और कॉर्पोरेट स्टाइल में चल रहे कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ।

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आरोपी राजुराम। फोटो- पत्रिका

जालोर। एंटी नारकोटिक्स टीम ने अंतरराज्यीय एमडी तस्कर राजुराम उर्फ राजेश विश्नोई निवासी भूकरों का तला, मिठड़ा पुलिस थाना धोरीमन्ना (बाड़मेर) को 6 माह के लंबे ऑपरेशन के बाद गिरफ्तार किया। इस तस्कर का जालोर और सांचौर में एमडी तस्करी नेटवर्क और अवैध फैक्ट्री की स्थापना में बड़ा रोल रहा है। तस्कर राजुराम 7 साल से फरार चल रहा था। इस तस्कर ने नशे का लंबा-चौड़ा कारोबार फैला रखा था। एएनटीएफ महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार के निर्देश पर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

आरोपी से हुई पूछताछ के अनुसार राजुराम जोधपुर, जालोर, सांचौर, बाड़मेर के इलाकों में कई फैक्ट्रियां लगाकर 2 से 3 क्विंटल एमडी बनाकर मार्केट में सप्लाई कर चुका है। यही नहीं, पूछताछ में इसने गुजरात, जोधपुर, जालोर, रोहट, पाली, मेवाड़ के अनेक थोक विक्रेताओं के नामों का खुलासा किया है, जिसके आधार पर इन आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी। तस्कर राजुराम उर्फ राजेश 40 हजार रुपए का इनामी आरोपी है। आरोपी मादक द्रव्यों की तस्करी के मामले में गुजरात राज्य से भी वांछित चल रहा है।

कॉर्पोरेट स्टाइल में चलता था एमडी कारोबार

आरोपी राजुराम ने अपने साथियों के साथ मिलकर राजस्थान में एमडी के नशे के कारोबार को कॉर्पोरेट अंदाज में चला रखा था। कुछ ही दिनों पहले कोलकाता से एएनटीएफ के शिकंजे में आया तस्कर रमेश इस कॉर्पोरेट बिजनेस का स्वयंभू सरगना था और उत्पादन विंग का चीफ हुआ करता था। पिछले दिनों रमेश की गिरफ्तारी के लिए एएनटीएफ ने ऑपरेशन विषाणुबाहु चलाया था और उसे कोलकाता से दबोचा था। स्वयं राजुराम एमडी के धंधे की मार्केटिंग विंग का सीईओ था और सप्लाई चेन और थोक विक्रेताओं से डीलिंग का चीफ था।

इसी तरह एक अन्य आरोपी मांगीलाल को फैक्ट्री मैनेजर और एक अन्य को अकाउंटिंग हेड बना रखा था। मार्केटिंग सीईओ के रूप में राजुराम ने राजस्थान से लेकर गुजरात और मध्य प्रदेश तक अपने एजेंटों का जाल बिछा रखा था। फैक्ट्री में माल का उत्पादन होते ही राजू माल लेकर निकल जाता और हाथों-हाथ पूरा माल थोक विक्रेताओं को बेच आता था। धीरे-धीरे राजू ने कई गुप्त फैक्ट्रियों से संपर्क साध लिया और उनके लिए मार्केटिंग का काम देखने लगा।

15 लाख प्रति ट्रिप का था राजू का धंधा

आईजी विकास कुमार के अनुसार करीब 12 साल पहले पप्पू जाणी नामक शराब तस्कर के लिए राजुराम ने भाड़े पर काम करना शुरू किया था। उस समय अवैध शराब को गुजरात ले जाने के लिए प्रति ट्रिप 15 हजार रुपए मिलते थे। कोरोना काल में अवैध शराब का धंधा थम गया तो नशे के बड़े तस्करों के साथ मिलकर अफीम और डोडा तस्करी का काम भी किया। तब राजुराम को प्रति ट्रिप डेढ़ लाख रुपए मिलते थे। बाद में वह इस धंधे का साझीदार हो गया था।

बाद में एमडी के बड़े तस्कर रमेश के संपर्क में आते ही राजू ने अफीम के कारोबार को त्याग दिया और एमडी के अवैध कारोबार में आ गया। अपने पुराने तस्करी नेटवर्क का फायदा उठाकर राजू एमडी सप्लाई के प्रति ट्रिप पर 15 लाख रुपए तक कमाने लगा। साइक्लोनर सेल के डर से रमेश के कोलकाता पलायन कर जाने के बाद दूसरे शातिर सरगना रमेश (यह दूसरा तस्कर था) के साथ साझेदारी में एमडी की फैक्ट्री लगाने लगा। इस दौरान रमेश भी पत्नी की हत्या के मुकदमे में जेल चला गया, तो पूरे नेटवर्क पर राजुराम उर्फ राजेश विश्नोई का दबदबा हो गया।

100 करोड़ एमडी बेच चुका राजुराम

पिछले 5 साल में राजुराम ने पहले रमेश नेड़ीनाडी और फिर रमेश कड़वासरा (यह दूसरा साथी) के साथ पार्टनरशिप में दर्जन भर एमडी बनाने की अवैध फैक्ट्रियां लगाकर 100 करोड़ रुपए की काली कमाई की। एएनटीएफ टीम के अनुसार राजुराम के पिता पांचाराम बॉर्डर होमगार्ड में हैं और अक्सर उनकी ड्यूटी सीमा की सुरक्षा में लगती है।

इधर आरोपी पिता की वर्दी का बेजा फायदा उठाता रहा। आरोपी ने पिता के पुलिस में होने का फायदा उठाया और रिश्तेदारों को भी सब्जबाग दिखाकर इस धंधे में शामिल करता रहा। हाल ही में बाड़मेर में एमडी की फैक्ट्री चलाते पकड़ा गया मांगीलाल, राजुराम का बहनोई है और वह उसका बड़ा पार्टनर भी रहा।

आरोपी जादू-टोना में विश्वास करता था

अपराधी राजुराम जादू-टोना, तंत्र-मंत्र और श्रद्धा-भक्ति में अगाध विश्वास रखता था। आरोपी का मानना था कि उसके आराध्य उसकी रक्षा करते हैं और इसी कारण उसके सारे साथी-प्रतिद्वंदी पकड़े जाने के बावजूद वह 7 सालों तक फरार रहा। पिछले कुछ महीनों से राजू हर अमावस्या को कैंची धाम और हरिद्वार धोक लगाने जाता था।

दो महीने पहले मिली सूचना पर एएनटीएफ ने बाड़मेर से उत्तराखंड के कैंची धाम और हरिद्वार तक उसका पीछा किया था। हरिद्वार के पास राजुराम की एएनटीएफ से भिड़ंत भी हुई थी, जिसमें उसकी गाड़ी को भारी नुकसान हुआ, लेकिन वह भागने में सफल रहा। गाड़ी टूट जाने के बाद राजुराम ने गुजरात से नई गाड़ी खरीदी थी। एएनटीएफ को इसकी सूचना मिल चुकी थी।

इस तरह से पकड़ा गया आरोपी

एमडी की सप्लाई चेन के सीईओ राजुराम की गिरफ्तारी के लिए चलाया गया यह अभियान अब तक के सबसे पुराने और लंबे अभियानों में से एक रहा। तीन बार की असफलता के बाद एएनटीएफ टीम को आरोपी की गिरफ्तारी में सफलता मिली। अमावस्या को कैंची धाम जाने से पहले राजुराम के अपने गांव में परिवार से मिलने आने की सूचना भी एएनटीएफ को मिल गई थी।

तस्कर राजुराम ने अमावस्या से पहले गांव आने के लिए ऐसा समय चुना, जब स्थानीय पुलिस वीआईपी दौरे की तैयारियों में व्यस्त थी। साथ ही उसने एएनटीएफ को गच्चा देने के लिए अपनी नई गाड़ी में अपने सहयोगियों को गांव भेज दिया और स्वयं मोटरसाइकिल से पहुंचकर घर से कुछ दूरी पर एक झोंपड़े में छिपकर बैठ गया।

एएनटीएफ टीम ने गाड़ी पर सीधे कार्रवाई नहीं की और सहयोगियों पर नजर रखी। इसी दौरान टीम ने देखा कि राजुराम की एक करीबी महिला अवसर देखकर झोंपड़े की ओर बढ़ी। पहले से सतर्क टीम ने उस महिला की गतिविधियों पर नजर रखते हुए उसका पीछा किया और झोंपड़े तक पहुंचकर राजुराम को पकड़ लिया।

इस तरह से अभियान का नामकरण हुआ

आरोपी राजुराम (राजू) के नाम से जुड़ी एक हिंदी फिल्म 'राजू बन गया जेंटलमैन' से ऑपरेशन का नाम जेंटल मेंटल रखा गया। आरोपी राजुराम की महिलाओं में बड़ी लोकप्रियता थी और वे उसे एक भद्र व सुशील व्यक्ति समझकर उससे संपर्क रखती थीं, जबकि उसके साथ के अपराधी मानते थे कि वह जादू-टोना करना जानता है और सामने वाले को मानसिक रूप से प्रभावित कर लेता है। महिलाओं के बीच जेंटल और साथियों के बीच मेंटल छवि के आधार पर इस ऑपरेशन का नाम जेंटल मेंटल रखा गया।