
सांचौर की कृषि मंडी। फोटो- पत्रिका
सांचौर। सीमावर्ती सांचौर क्षेत्र में कृषि उपज का बड़ा हिस्सा गुजरात की मंडियों में जाने से स्थानीय कृषि मंडी और राज्य सरकार को हर वर्ष करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के व्यापारियों का आरोप है कि गुजरात की मंडियों से जुड़े बिचौलिए किसानों को अधिक भाव का लालच देकर स्थानीय मंडियों के खिलाफ भड़काते हैं और फसल गुजरात भिजवा देते हैं। इसके चलते सांचौर कृषि मंडी में अपेक्षित आवक नहीं हो पा रही है, वहीं सरकार को जीएसटी के रूप में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यापारियों के अनुसार सांचौर क्षेत्र के करीब 260 गांवों में बड़ी संख्या में जीरा, ईसबगोल, रायड़ा, अरण्डी और मूंगफली की पैदावार होती है। आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र में हर वर्ष 70 से 80 हजार बोरी जीरा, 15 से 20 हजार बोरी ईसबगोल, 5.50 से 6 लाख बोरी रायड़ा, 5 से 5.50 लाख बोरी अरण्डी तथा करीब 4 लाख बोरी मूंगफली का उत्पादन होता है, लेकिन इसका मात्र 10 प्रतिशत माल ही सांचौर कृषि मंडी तक पहुंच पाता है। शेष 90 प्रतिशत उपज गुजरात की मंडियों में चली जाती है।
व्यापारियों का कहना है कि इससे स्थानीय कृषि मंडी को हर वर्ष लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है, जबकि राजस्थान सरकार को जीएसटी के रूप में भी काफी राजस्व हानि उठानी पड़ रही है। उनका आरोप है कि गुजरात की मंडियों में पहुंचने के बाद किसानों को वादे के अनुरूप भाव नहीं मिलते और परिवहन खर्च अधिक होने के कारण किसान वहां से फसल वापस भी नहीं ला सकते हैं। ऐसे में वे मजबूरी में कम दाम पर उपज बेचने को विवश हो जाते हैं।
व्यापारी किशनलाल भट्ट ने बताया कि सांचौर क्षेत्र की अधिकांश उपज गुजरात चली जाने से स्थानीय व्यापारी, किसान और मंडी सभी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिचौलियों के जरिए किसानों को झांसे में लेकर माल बाहर भेजा जा रहा है। वहीं व्यापारी अशोक राठी, प्रवीण जोशी, तलसाराम चौधरी, सैंधाराम पुरोहित और नरेंद्र चौधरी ने बताया कि किसानों को अधिक भाव का प्रलोभन देकर गुजरात बुलाया जाता है, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें कम कीमत देकर ठगी का शिकार बनाया जाता है।
Updated on:
09 May 2026 02:52 pm
Published on:
09 May 2026 02:32 pm
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