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वसुंधरा फॉर्मूले से बीजेपी का परहेज, 15 वीं विधानसभा के आखिरी बजट सत्र में भी नहीं बनेगी शैडो केबिनेट

अलग-अलग विभागों के मंत्री रहे विधायक विपक्ष में रहते हुए संबंधित विभागों के उठाते थे सवाल, साल 2008 से 2013 तक बीजेपी शैडो कैबिनेट के जरिए सदन में घेरते थे मंत्रियों को, बीजेपी में आपसी खींचतान को भी माना गया शैडो केबिनेट नहीं गठित करने की वजह

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जयपुर। प्रदेश भाजपा में भले ही एकजुटता के लाख दावे किए जाते हों लेकिन पिछले 4 साल से लगातार पार्टी में आपसी खींचतान चली आ रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि 13 वीं विधानसभा में जहां कई बार विधानसभा सत्र के दौरान सदन में शैडो केबिनेट के जरिए बीजेपी मंत्रियों और सरकार को घेरकर परेशानी में डालती रही थी उसी शैडो केबिनेट से 15वीं विधानसभा में परहेज रखा गया है, 15वीं विधानसभा के 4 बजट सत्र बीत चुके हैं और 5वां बजट सत्र भी अब 23 जनवरी से शुरू हो रहा है लेकिन बीजेपी शैडो केबिनेट से इस बार भी परहेज कर रही है। पार्टी के कई नेता शैडो केबिनेट को लेकर फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं वहीं कई नेता इस पर खुलकर नहीं बोल रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का फॉर्मूला था शैडो केबिनेट
दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को शैडो केबिनेट फॉर्मूला बीजेपी में लागू करने का श्रेय दिया जाता है। साल 2008 से लेकर 2013 तक जब भाजपा विपक्ष में थी तब वसुंधरा राजे ने शैडो कैबिनेट का फॉर्मूला लागू किया था और उसी के जरिए बीजेपी 5 साल बजट सत्र के दौरान गहलोत सरकार और उनके मंत्रियों को विभागवार घेरने का काम किया था, लेकिन इस बार 15वीं विधानसभा के 4 बजट सत्र बीत चुके हैं और 5वां बजट सत्र भी अब शुरू होने जा रहा है लेकिन बीजेपी ने 15वीं विधानसभा में वसुंधरा राजे के शैडो कैबिनेट के फॉर्मूले से परहेज ही रखा है।

आपसी खींचतान भी बड़ी वजह
वहीं सूत्रों की मानें तो इस बार शैडो केबिनेट से परहेज करने की एक वजह आपसी खींचतान भी है। पार्टी के अंदर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गुट के नेता फिलहाल हाशिए पर ही चल रहे हैं। खुद वसुंधरा राजे भी पार्टी के अधिकांश कार्यक्रम से दूर ही रहीं हैं, वहीं उनके समर्थक विधायक भी अधिकांश कार्यक्रमों से दूर रहते हैं। साल 2020 में गहलोत सरकार पर आए सियासी संकट के दौरान भी वसुंधरा राजे समर्थक विधायकों पर गहलोत सरकार को बचाने के आरोप लगे थे।

यह होती है शैडो कैबिनेट
वहीं विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी की ओर से गठित की जाने वाली शैडो कैबिनेट में उन अनुभवी विधायकों को शामिल किया जाता है जो पहले मंत्री रह चुके हों और उन्हें विभाग चलाने का अनुभव हो उन्हें ही शैडो कैबिनेट में लिया जाता है। शैडो केबिनेट में विधायकों को जो विभाग आवंटित किए जाते थे, विधायक उन्हीं विभागों से जुड़े सवाल और मुद्दों को लेकर संबंधित मंत्री को सदन में घेरने का का काम करते हैं।

इनका कहना है
शैडो केबिनेट को लेकर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है, विधायक दल की बैठक में देखेंगे कि क्या तय होता है।
जोगेश्वर गर्ग, सचेतक भाजपा विधायक दल

शैडो केबिनेट को लेकर अभी तक कुछ तय नहीं हुआ है, विधायक दल की बैठक में इस पर सभी की राय लेंगे।
राजेंद्र राठौड़, उप नेता प्रतिपक्ष राजस्थान विधानसभा