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Shardiya Navratri 2023: नवरात्र में हाथी पर सवार होकर आएगी माता, घट स्थापना के लिए मिलेंगे सिर्फ 46 मिनट, जानें श्रेष्ठ मुहूर्त

Shardiya Navratri 2023: देवी आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर 15 अक्टूबर को शुरू होगा। इस दिन सुबह चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग होने से दोपहर में अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।

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Shardiya Navratri 2023: नवरात्र में हाथी पर सवार होकर आएगी माता, घट स्थापना के लिए मिलेंगे सिर्फ 46 मिनट, जानें श्रेष्ठ मुहूर्त

Shardiya Navratri 2023: नवरात्र में हाथी पर सवार होकर आएगी माता, घट स्थापना के लिए मिलेंगे सिर्फ 46 मिनट, जानें श्रेष्ठ मुहूर्त

जयपुर। देवी आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा पर 15 अक्टूबर को शुरू होगा। इस दिन सुबह चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग होने से दोपहर में अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। ऐसे में घट स्थापना के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त 46 मिनट का ही रहेगा। इस दिन दुर्गा माता हाथी पर सवार होकर आएगी, जो सुख—समृद्धि लेकर आएगी। इस बार पूरे 9 दिन के नवरात्र होंगे।

ज्योतिषाचार्यों की मानें तो देवी पुराण में देवी का आह्वान, स्थापना व पूजन प्रात:काल में करना शुभ बताया गया है, लेकिन चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग में घट स्थापना त्याज्य है। ज्योतिषाचार्य आदित्य मोहन शर्मा ने बताया कि शारदीय नवरात्र के पहले दिन सुबह चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग है। हालांकि एक दिन पहले 14 अक्टूबर को ही चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग के दो अंश निकल जाने से लाभ और अमृत के चौघड़िए में सुबह 9 बजकर 22 मिनट से दोपहर 12 बजकर 13 मिनट पर घट स्थापना की जा सकेगी।

चित्रा नक्षत्र शाम 6:12 बजे तक
ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा का कहना है कि रविवार को चित्रा नक्षत्र शाम 6:12 बजे तक रहेगा और वैधृति योग सुबह 10:24 बजे तक है। हालांकि इन दोनों के आदि के दो चरणों को त्याग कर घट स्थापना करने की शास्त्रों में अनुमति दी गयी है। नवरात्र के पहले दिन चित्रा व वैधृति के प्रथम दो चरण सूर्योदय के पहले ही समाप्त हो चुके है। अत: नवरात्र का प्रारम्भ प्रात:काल 6:30 से प्रात: 8:47 तक करना शास्त्र—सम्मत होगा।

घट स्थापना के मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त — सुबह 11:50 से दोपहर 12:36 तक
चर—लाभ—अमृत के चौघड़िए — सुबह 7:55 से दोपहर 12:13 बजे तक
शुभ का चौघड़िया — दोपहर 01:38 से दोपहर 3:04 बजे तक

दुर्गा माता हाथी पर सवार होकर आएगी
आश्विन माह की प्रतिपदा 14 अक्टूबर को रात 11:24 बजे शुरू होगी, जो 15 अक्टूबर की दोपहर 12:32 बजे तक रहेगी। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 15 अक्टूबर से होगी। ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्र स्थापना रविवार को होने से देवी मां हाथी पर सवार होकर आएगी। देवी भागवत पुराण के अनुसार माता रानी की हाथी सवारी होने से पानी ज्यादा बरसता है। माता रानी समृद्धि लेकर आएगी। उत्थापन मंगलवार को होने से देवी मुर्गे पर सवार होकर जाएगी।

नवरात्र के उत्सव त्योहार
15 अक्टूबर - शारदीय नवरात्र प्रारम्भ, अग्रसेन जयंती
20 अक्टूबर - छठ पूजन व मेला, सरस्वती आवाहन
21 अक्टूबर - महासप्तमी, सरस्वती पूजन
22 अक्टूबर - महा अष्टमी, दुर्गाष्टमी, सरस्वती बलिदान, सरस्वती विसर्जन
23 अक्टूबर — महानवमी, शारदीय नवरात्र समाप्त, आयुध व नवाश्व पूजा, हेमन्त ऋतु प्रारम्भ
24 अक्टूबर - विजयादशमी, दशहरा पर्व, नवरात्र पारणाव उत्थापन, अपराजिता-शमी पूजा

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शारदीय नवरात्र में किस दिन किसकी पूजा
15 अक्टूबर - मां शैलपुत्री (पहला दिन) प्रतिपदा तिथि
16 अक्टूबर - मां ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) द्वितीया तिथि
17 अक्टूबर - मां चंद्रघंटा (तीसरा दिन) तृतीया तिथि
18 अक्टूबर - मां कुष्मांडा (चौथा दिन) चतुर्थी तिथि
19 अक्टूबर - मां स्कंदमाता (पांचवा दिन) पंचमी तिथि
20 अक्टूबर - मां कात्यायनी (छठा दिन) षष्ठी तिथि
21 अक्टूबर - मां कालरात्रि (सातवां दिन) सप्तमी तिथि
22 अक्टूबर - मां महागौरी (आठवां दिन) दुर्गा अष्टमी
23 अक्टूबर - महानवमी, (नौवां दिन) नवरात्र व्रत पारण
24 अक्टूबर - मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, दशमी तिथि (दशहरा)