
Shashi Tharoor vs Ashok Gehlot for Congress President: एक तरफ राहुल गांधी (Rahul Gandhi) दक्षिण से पदयात्रा शुरू कर देश को एक सूत्र में पिरोने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस में जान फूंकने के लिए पैर चला रहे हैं तो दूसरी तरफ अब उसी कांग्रेस पार्टी (Congress Party) में अध्यक्ष पद के लिए उत्तर और दक्षिण में जूतमपैजार होने की स्थिति दिखाई दे रही है। राहुल गांधी अगर कांग्रेस से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने से इंकार करते हैं तो दक्षिण से शशि थरूर (Shashi Tharoor) और फिर उत्तर से राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) मैदान में होंगे। एक बार फिर से उत्तर और दक्षिण की जंग होने के पूर्ण आसार हैं। भाषा की बात हो या संस्क्ृति की। सदियों से उत्तर और दक्षिण में एक जंग रही है। राजनीति में यह स्थिति बहुत ही गंभीर रही है।
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गांधी परिवार के बेहद करीबी अशोक गहलोत अगले महीने प्रस्तावित अध्यक्ष चुनाव के लिए राहुल गांधी को अपने नामांकन से पहले मना तो रहे हैं लेकिन अगर राहुल गांधी नहीं मानते हैं तो फिर कांग्रेस की अंदूरनी महाभारत में अशोक का चक्र चलना तय माना जा रहा है और फिर राजनीतिक महाभारत भी उसी शक्ल की होगी। पिछले दिनो अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में सोनिया गांधी ने अशोक गहलोत को अध्यक्ष पद संभालने के लिए तैयार रहने को कहा था। हालांकि अशोक गहलोत अब भी यही प्रयास कर रहे हैं कि उन्हें अध्यक्ष न बनना पड़े और राहुल गांधी को वह किसी तरह इसके लिए तैयार कर लें। असल बात यह है कि वह राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी किसी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
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वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के अंदर विरोधी गुट जी-23 के सदस्य शशि थरूर ने अध्यक्ष पद के लिए कमर कस ली है। उनके पीछे पार्टी के कई सदस्य और सांसद हैं। पांच सांसदों ने चुनाव अधिकारी मधुसूदन को यहां तक लिख दिया कि जो वोटर हैं उनकी लिस्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए। इससे पहले यह कहा जा रहा था कि शशि थरूर को भी सोनिया गांधी ने ही चुनाव लडने के लिए ही कहा था। चुनाव का नामांकन 24 सितंबर से शुरू हो जाएगा और अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की गई है। 20 अगस्त तक चुनाव की पूरी प्रकिया संपूर्ण कर ली जाएगी। 20 या फिर 21 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए विजेता की घोषणा होगी।
सोनिया कांग्रेस तो अशोक राजस्थान नहीं छोडना चाहते
कांग्रेस पार्टी में घमासान मचा हुआ है। इसमें एक तरफ कांग्रेस पार्टी पर सोनिया गांधी अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाह रही हैं। ऐसे में वह चाहती हैं कि राहुल की अनुपस्थिति में उनके बेहद खास और अनुभवी अशोक गहलोत पार्टी अध्यक्ष की कमान संभाले जिससे पार्टी पर उनकी पकड़ मजबूत बनी रही। वहीं अशोक गहलोत राजस्थान नहीं छोड़ना चाहते हैं वह चाहते हैं कि पार्टी का राहुल गांधी अध्यक्ष बने बाकी वह पीछे से सब संभाल लेंगेे और राजस्थान पर भी पकड़ मजबूत बनी रहेगी। इससे दोनों कार्य सिद्ध हो जाएंगे। अशोक गहलोत बेहद पेंचीदा राजनीति के लिए जाना जाता है। ऐसे में वह नहीं चाहते हैं राजस्थान में उनके हटने के बाद सचिन पायलट उड़ान भरें।
Published on:
20 Sept 2022 03:25 pm
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