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शौर्य चक्र विजेता की विधवा को मिला 27 वर्ष बाद न्याय, आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल ने दिया हक में फैसला

Shaurya Chakra Winner Widow got Justice : भगवान के यहां देर है, अंधेर नहीं। शौर्य चक्र विजेता की विधवा को 27 वर्ष संघर्ष के बाद न्याय मिला। जब आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल की जयपुर बेंच ने उनके हक में फैसला सुनाया तो शहीद की विधवा की आंखें भर आईं।

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Shaurya Chakra Winner Widow got Justice

भारतीय नौसेना में अदम्य साहस का परिचय देते हुए वर्ष 1996 में शहीद हुए महिपाल यादव की पत्नी मीना यादव को 27 वर्ष बाद न्याय मिला है। आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल की जयपुर बेंच ने उनके पक्ष में फैसला किया है। अलवर के भिवाड़ी में रहने वाली मीना ने फैसले के बाद कहा कि भगवान के यहां देर है, अंधेर नहीं। दरअसल, ऐसी नौबत क्यों आई, क्यों नौसेना के बहादुर जवान की पत्नी को 27 वर्ष तक न्याय के लिए इंतजार करना पड़ा। इसके लिए हमें वर्ष 1996 में जाना होगा। तब 19 जुलाई को सावित्री युद्धपोत पर तैनात महिपाल बंगाल की खाड़ी में युद्धाभ्यास कर रहे थे। मर्चेंट नेवी के सहयोग से ईंधन भरने के दौरान तकनीकी दिक्कत आ गई। दिक्कत को दूर करने, युद्धपोत और इस पर सवार जवानों को बचाने के लिए महिपाल पानी में उतर गए। उन्होंने दिक्कत को तो दूर कर दिया, लेकिन उनके गंभीर चोट लगने से पानी में ही मृत्यु हो गई।



25 अगस्त को सुनाया बेंच ने फैसला

महिपाल के इस साहस के लिए उनकी पत्नी मीना यादव को तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने 26 जनवरी, 1997 को शौर्य चक्र प्रदान किया। हालांकि, शहीद की पत्नी मीना को स्पेशल फैमिली पेंशन (सैलरी का 60 प्रतिशत) में शामिल कर दिया गया। इसके लिए मीना ने कई बार पत्राचार भी किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। परेशान होकर दिसम्बर 2021 में उन्होंने आर्म फोर्स ट्रिब्यूनल का सहारा लिया। 25 अगस्त को बेंच ने लिबरलाइज फैमिली पेंशन (सैलरी का शतप्रतिशत) के तहत भुगतान करने का आदेश दिया है।

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फैसले के बाद बकाया पैसे का होगा भुगतान - एडवोकेट

रि. कमांडर, भारतीय नौसेना एडवोकेट रामेश्वर लाल ने बताया दोनों पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने केंद्र को आदेश दिया कि वह मीना यादव को छह माह के भीतर लिबरलाइज फैमिली पेंशन के तहत भुगतान करे। इस फैसले से बकाया पैसे का भी भुगतान होगा।

न्याय के लिए 27 साल लड़ी लड़ाई - मीना यादव

शहीद महीपाल की पत्नी मीना यादव ने कहा, मैंने न्याय के लिए 27 साल लड़ाई लड़ी। कई बार पत्राचार किया। दो बेटियों को पढ़ाया। बड़ी बेटी प्रियंका डॉक्टर है और छोटी बेटी मनीषा नौसेना में रहकर देश सेवा कर रही है।

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