
Shukra Grah Ko Majbut Kaise Banaye Venus Transit 2021
जयपुर. नवग्रहों में बृहस्पति और शुक्र सबसे शुभ ग्रह हैं। बृहस्पति देवगुरू यानि देवताओं के गुरू हैं और शुक्र यानि शुक्राचार्य दैत्यों के गुरू हैं। जीवन के समस्त सुख कुंडली में इन दोनों गुरू ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करते हैैंं। ज्योतिषाचार्य पंडित एमकुमार शर्मा के अनुसार बृहस्पति की स्थिति अच्छी हो तो समस्त सुख सहजता से प्राप्त हो जाते हैं जबकि शुक्र की स्थिति अच्छी हो तो सभी भौतिक सुख प्रचुरता से प्राप्त होते हैं। दोनों गुरू ग्रह सुख के दाता हैं पर देवगुुरू अर्थात बृहस्पति जहां धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभूति भी कराते हैं वहीं दैत्य गुरू शुक्रदेव भोगवादी बनाते हैं।
हालांकि यह भी सच है कि बड़े धर्मगुरूओं या आध्यात्मिक शख्सियतों का शुक्र भी बहुत मजबूत होता है पर मूलतः ये हैं विलासिता के कारक। धन, वैभव, ऐश्वर्य, आकर्षण और प्रेम के कारक शुक्र देव ही हैं। बृहद पराशर होरा शास्त्र में कहा गया है कि .जिसका शुक्र बलवान हो वह सुंदर, चमकीले नेत्रवाला, पढ़ने.लिखने का शौकीन, कफ एवं वायु प्रकृति का होता है। जिसकी कुंडली में शुक्र केंद्र में या त्रिकोण में हों वह उपरोक्त विशेषताओं से युक्त होता है। शुक्र प्रधान व्यक्ति बेहद आकर्षक होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरेेंद्र नागर बताते हैं कि शुक्र मुख्यतः सभी सांसारिक सुखों के कारक हैं। इनमें धन संपत्ति, आभूषण में खासतौर पर हीरा, श्वेत वस्त्र, सुगंधित और सौंदर्य सामग्री, कामेच्छा, प्रेम ,सौंदर्य, आकर्षण, गीत संगीत, दांपत्य सुख, इंद्रिय सुख शामिल हैं. सिनेमा, मनोरंजन, सभी विलासी कार्य, शैया सुख, काम कला, कामसुख, कामशक्ति, पत्नी एवं प्रेमी-प्रेमिका, होटल, मदिरा सेवन आदि भी शुक्र ग्रह के अधीन माने जाते हैं। वीर्य, रेशमी वस्त्र, सुगंधित द्रव्य भी शुक्र के ही कारकत्व हैं।
जिनकी कुंडली में शुक्र अच्छी स्थिति में हों, कारक ग्रह हों, उच्च के हों तो उन्हें उपरोक्त सभी सुख मिलते हैं. ऐसे लोग भोगी-विलासी, मधुर स्वभाव वाले, चालाक और स्त्री से लाभ प्राप्त करनेवाले होते हैं। इसके विपरीत जिनकी कुंडली में शुक्र कमजोर हो, नीच का हो, अस्त हो तो उन्हें भौतिक सुख बहुत कम मात्रा में और बमुश्किल मिल पाते हैं। सांसारिक सुखों में कमी आती है। शुक्र की अशुभता की स्थिति मेें स्त्री सुख में कमी रहती है और प्रमेह, मूत्राशय के रोग, गर्भाशय के रोग और गुप्त रोग होने की आशंका बढ़ जाती है।
ऐसे लोगों को अपने शुक्र को मजबूत बनाने के उपाय करना चाहिए. ज्योतिषाचार्य सोमेश परसाई के अनुसार शुक्र की अशुभता दूर करने के लिए श्रीसूक्त का पाठ करना सर्वाेत्तम उपाय है। लक्ष्मीजी की पूजा से शुक्र प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही शुक्र का बीज मंत्र भी लाभकारी होगा। शुक्र से संबंधित वस्तुओं जैसे चावल, दूध, श्वेत वस्त्र, चांदी आदि का दान करने, शुक्रवार का व्रत करने, दुर्गा सप्तशती का पाठ करने, हीरा धारण करने और कन्या पूजन करने से भी शुक्र बलवान बनता है।
Published on:
31 Dec 2020 04:30 pm
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