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15 वीं राजस्थान विधानसभा फिर 199 के फेर में फंसी, 4 साल में 6 विधायकों का निधन

-राजस्थान विधानसभा को लेकर मिथक, आमतौर पर एक साथ कभी भी 200 विधायक नहीं रहे सदन में,राजस्थान विधानसभा में पहले भी भूत प्रेत का साया होने का मामला उठ चुका है

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जयपुर। कांग्रेस के सात बार के विधायक भंवरलाल शर्मा के रविवार को निधन के बाद राजस्थान विधानसभा एक बार फिर 199 के फेर में फंस गई है। राजस्थान विधानसभा को लेकर मिथक बना हुआ है कि यहां कभी भी एक साथ 200 सदस्य नहीं बैठते हैं, अब कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक के निधन के बाद एक बार फिर से इस तरह की चर्चाएं चल पड़ी हैं।

दिलचस्प बात तो यह है कि अकेले 15 वीं विधानसभा के 4 साल के कार्यकाल में भंवर लाल शर्मा छठे ऐसे विधायक हैं जिनका निधन हुआ है। हालांकि भंवर लाल शर्मा गंभीर बीमारियों से ग्रस्त थे और लंबे समय से उनका ट्रीटमेंट चल रहा था लेकिन उनके निधन को भी उस मिथक से ही जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें विधायकों की ओर से विधान सभा को अपशकुन बताते हुए विधानसभा परिसर में भूत प्रेत होने के दावे किए गए थे।

4 साल में 6 विधायकों का निधन
15 वीं राजस्थान विधानसभा के 4 साल के कार्यकाल में अब तक 6 विधायकों का निधन हो चुका है, जिनमें चार कांग्रेस और 2 बीजेपी के विधायक हैं। इनमें कांग्रेस के मास्टर भंवर लाल मेघवाल, कैलाश त्रिवेदी, गजेंद्र सिंह शक्तावत और भंवर लाल शर्मा हैं तो वहीं बीजेपी की विधायक किरण माहेश्वरी और गौतम लाल मीणा का निधन हो चुका है।

चार साल में किसका कब हुआ निधन
-7 अक्टूबर 2020: कांग्रेस विधायक कैलाश चंद त्रिवेदी का निधन
-17 नवंबर 2020: कैबिनेट मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल का निधन
-30 नवंबर 2020: भाजपा विधायक किरण माहेश्वरी का निधन
-20 जनवरी 2021: कांग्रेस विधायक गजेंद्र सिंह शक्तावत का निधन
-19 मई 2021: भाजपा विधायक गौतम लाल मीणा का निधन
-9 अक्टूबर 2022: कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा का निधन


पूर्व में भी विधायकों ने उठाई थी मांग
इससे पहले पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के समय अप्रेल 2018 में विधायक कल्याण सिंह के निधन के बाद भी विधानसभा परिसर में हवन यज्ञ करवाने की मांग की गई थी। तत्कालीन मुख्य सचेतक कालू लाल गुर्जर और भाजपा विधायक हबीबुर्रहमान ने भी इस तरह की मांग उठाई थी। विधायकों का कहना था कि विधानसभा परिसर मोक्ष धाम से सटा हुआ है, या फिर मोक्ष धाम का भी कुछ हिस्सा विधानसभा परिसर में आता है।

2001 में बनी थी नई विधानसभा
दरअसल हवामहल के पास स्थित पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा लाल कोठी के पास बने नए भवन में शिफ्ट की गई थी जिसके बाद फरवरी 2002 में अजमेर पश्चिम से विधायक किशन मोटवानी की भी विधायक रहते मौत हुई थी। दिसंबर 2002 में बानसूर से विधायक जगत सिंह दायमा और भीखाभाई का भी विधायक रहते निधन हुआ था। रामसिंह विश्नोई, अरुण सिंह और नाथूराम आहार का भी विधायक रहते देहांत हुआ था।

वीडियो देखेंः- राजस्थान विधानसभा बजट सत्र : फिर निशाने पर रहे मंत्री