
विकास जैन /जयपुर। सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने डायबिटीज की शुरुआत करने वाले जीनोम का पता लगाने में सफलता हासिल कर ली है। इन्हें मेटाजीनोम नाम दिया गया है। जीनोमिक तकनीक से मेटाजीनोम की पहचान के बाद ई-मशीन लर्निंग मॉडल (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के जरिये स्टडी टीम में शामिल डॉक्टर्स के पास उपलब्ध डेटा और विश्व में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डायबिटीज के डेटा का विश्लेषण करने पर यह कामयाबी मिली। जिन लोगों में मेटाजीनोम हैं, उनमें डायबिटीज होने की 70 से 80 प्रतिशत आशंका रहेगी। यह शोध बायोमोलिक जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
अभी तक डायबिटीज की जांच ब्लड शुगर और बायोकैमेस्ट्री जांच से की जाती है। लेकिन इसमें बीमारी को जड़ से खत्म करने में कामयाबी नहीं मिल पाती। अब मेटाजीनोम स्टडी के बाद भविष्य में डायबिटीज होने से बचाने वाली दवाइयां बन सकेंगी और बीमारी को जड़ से भी खत्म किया जा सकेगा।
सामने आई इंसान की पूरी जन्म कुंडली
डॉ.संदीप माथुर, एंडोक्रायनोलॉजिस्ट, सवाईमानसिंह मेडिकल
इंसान में होने वाले हार्मोन और बायोकैमिकल बदलाव को उनके जीन्स नियंत्रित करते हैं। ह्यूमन जीनोम सामने आने के बाद जीन्स की भी स्टडी करने की तकनीक आ गई और वह सस्ती होती जा रही है। डायबिटीज की शुरूआत इंसुलिन रेजिस्टेंस से होती है। हमने इस रेजिस्टेंस के मेटाजीनोम की पहचान की। इसमें हमें करोड़ों जीनोम में से वो जीनोम पता कर पाए, जिनसे यह रेजिस्टेंस होता है।
इसे मेटाजीनोम नाम दिया गया। मेटाजीनोम से डायबिटीक मरीजों में यह पता चल गया कि इसमें डायबिटीज की 70-80 प्रतिशत आशंका होगी। इसके विश्लेषण के लिए एआई का इस्तेमाल किया। एक तरह से दो तकनीकों के जरिये हमने पूरी जन्म कुंडली देखने में सफलता प्राप्त की। इस अध्ययन में मेरे साथ मथुरा के डॉ.आदित्य सक्सेना, डॉ.नितिश माथुर, डॉ.प्रदीप तिवारी भी शामिल रहे।
Published on:
15 Aug 2023 04:24 pm
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