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SOG Action: बाड़मेर में डमी कैंडिडेट बैठाकर बना सरकारी शिक्षक, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में दिखाई चालाकी, आरोपी गिरफ्तार

Rajasthan News: राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर कार्रवाई के बीच एसओजी ने वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। बाड़मेर के एक अभ्यर्थी ने अपनी जगह डमी कैंडिडेट बैठाकर परीक्षा पास की और बाद में दस्तावेज सत्यापन के दौरान फोटो बदलकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।

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Govt Teacher Arrested

आरोपी का फोटो: पत्रिका

Dummy Candidate Scam In RPSC Exam: राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 में अपनी जगह डमी कैंडिडेट बैठाकर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले आरोपी को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी करीब साढ़े तीन साल से पुलिस को चकमा देकर लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। मामले में गिरफ्तारी के बाद एसओजी अब उस व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है जिसने परीक्षा में आरोपी की जगह बैठकर पेपर दिया था।

एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि हेल्पलाइन पर मिली एक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 (विज्ञान विषय) में अभ्यर्थी श्रवण कुमार विश्नोई (निवासी धोरीमन्ना, बाड़मेर) ने स्वयं परीक्षा देने के बजाय अपने स्थान पर किसी अन्य युवक को बैठाया था। शिकायत मिलने के बाद एसओजी ने मामले की गहन जांच शुरू की और विभिन्न दस्तावेजों का परीक्षण किया।

यूं खुला फर्जीवाड़ा

जांच के दौरान एसओजी ने आरपीएससी से आरोपी के आवेदन पत्र, प्रवेश पत्र, उपस्थिति पत्रक, ओएमआर शीट तथा पात्रता जांच से जुड़े दस्तावेज जब्त किए। दस्तावेजों के विश्लेषण और हस्ताक्षरों के मिलान में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि श्रवण कुमार ने 24 दिसंबर 2022 को जोधपुर के बालसमंद स्थित परीक्षा केंद्र पर आयोजित विज्ञान विषय की परीक्षा तथा 29 जनवरी 2023 को कालीबेरी स्थित केंद्र पर आयोजित सामान्य ज्ञान की परीक्षा में अपने स्थान पर दूसरे व्यक्ति को बैठाया था।

एसओजी अधिकारियों के अनुसार दोनों परीक्षाओं में उपस्थित व्यक्ति और बाद में नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल हुए व्यक्ति के दस्तावेजों में अंतर पाया गया। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की भूमिका की पुष्टि की गई।

चयन के बाद दस्तावेज में बदला फोटो

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि डमी अभ्यर्थी की मदद से परीक्षा पास करने के बाद जब आरोपी का चयन वरिष्ठ अध्यापक पद पर हो गया, तो उसने दस्तावेज सत्यापन के दौरान अपनी असली फोटो प्रस्तुत कर दी। उसने विभाग में विस्तृत आवेदन और पात्रता सत्यापन प्रपत्रों में स्वयं की तस्वीर लगाकर पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाने का प्रयास किया और सरकारी सेवा हासिल कर ली।

एसओजी का मानना है कि इस फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भी भूमिका हो सकती है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उस डमी कैंडिडेट की तलाश जारी है, जिसने परीक्षा में बैठकर उसे सरकारी नौकरी दिलाने में मदद की। जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क का पता लगाने और मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।