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दक्षिण रेलवे ने चिन्हित किए मार्ग जिनमें लगेगी देसी ‘कवच तकनीकÓ

रेल पटरियों के बगल में लगाई जाने वाली इस कवच तकनीक से ट्रेनों के होने वाले हादसों से बचा जा सकेगा।

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कवच तकनीक

रेल पटरियों के बगल में लगाई जाने वाली इस कवच तकनीक से ट्रेनों के होने वाले हादसों से बचा जा सकेगा।

जयपुर। ट्रेनों की टक्कर रोकने के लिए रेलमार्ग पर लगाने के लिए देशी तौर पर कवच तकनीक को खास तौर पर विकसित किया गया है। आगामी दिनों में दक्षिम पश्चिम रेलवे (दपरे) के कार्य क्षेत्र में भी इस तकनीक को अपनाने के लिए रेल मार्गों को चिन्हित किया गया है।
इन रूटों का चयन
रेल पटरियों के बगल में लगाई जाने वाली इस कवच तकनीक से ट्रेनों के होने वाले हादसों से बचा जा सकेगा। दपरे कार्य क्षेत्र के वास्को-लोंडा, धारवाड़-बल्लारी-गुंतकल-गुंटूर-विजयवाडा, विजयवाडा-मचलीपट्टणम, गुंटूर-बीबनगर, काजिपेट-वाडी, पुणे-मिरज-लोंडा-हुब्बल्ली-हरिहर-चिक्कजाजूर-बिरूर-अरसिकेरे-यशवंतपुर-जोलारपेट-सलेम बैपनहल्ली-होसूर-सलेम करूर-दिंदिगुल-मधुराई-कन्याकुमारी, बेंगलूरु-मैसूरु मार्ग पर कवच तकनीक अपनाई जा रही है। प्रथम चरण में अधिक ट्रेनों के दबाव वाले मार्ग पर कवच तकनीक अपनाई गई है। इसके बाद विभिन्न चरणों में सभी मार्गों पर इस तकनीक को अपनाया जाएगा।
रेल मंत्री कर चुके हैं तकनीक की जांच
कवच तकनीक अपनाए मार्ग पर परीक्षार्थ तौर पर शुक्रवार को ट्रेन चली थी। सिकंदराबाद के पास कल्लगूड-चितगिड्ड स्टेशन के बीच चली इस ट्रेन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सफर करने के जरिए इस तकनीक की प्रायोगिक समीक्षा की थी। परीक्षार्थ तौर पर चली ट्रेन प्रति घंटा 160 किलोमीटर रफ्तार में चली थी। इस ट्रेन की चली पटरी पर ही सामने से एक और ट्रेन का इंजन आ रहा था। ट्रेन का इंजन अभी बहुत दूर होने पर ही रेल मंत्री स्थित ट्रेन की रफ्तार अचानक धीमी हो गई। सामने आ रही रेल इंजन के 386 मीटर की दूरी पर रहते ही रेल मंत्री स्थित ट्रेन अपने आप रुक गई।
ऐसे रुकेंगे हादसे
ट्रेन के एक ही मार्ग पर आमने-सामने या फिर एक ही पटरी पर खड़ी ट्रेन के पीछे से आकर टकराने से यह नई तकनीक रोकेगी। रेल पटरी के बगल में अपनाए गए मार्ग पर स्थित रेडियो फ्रिक्वेंसी तकनीक से ट्रेन की रफ्तार अपने आप धीमी होकर रुक जाएगी। लाल सिग्नल होने पर लोको पायलट को ट्रेन की रफ्तार को कम करना चाहिए परन्तु लोको पायलट की लापरवाही से रफ्तार कम नहीं करने पर भी इस तकनीक की मदद से अपने आप रफ्तार कम हो जाएगी। पांच किलोमीटर क्षेत्र में ट्रेन परिवहन करने के एक ही मार्ग पर एक और ट्रेन के होने पर भी अपने आप रफ्तार कम होकर रुक जाएगी। वर्तमान बजट में दक्षिण मध्य रेलवे कार्य क्षेत्र तथा दिल्ली-मुंबई और दिल्ली कोलकता कॉरिडोर के लगभग दो हजार किलोमीटर मार्ग पर कवच तकनीक को अपनाने की घोषणा की गई थी।
हादसों को रोकने में मददगार
दपरे कार्य क्षेत्र में आगामी दिनों में कवच तकनीक अपनाने के लिए रेल मार्गों को चिन्हित किया गया है। यह तकनीक ट्रेनों के बीच होने वाले हादसों को रोकने में मददगार होगी।
-अनीश हेगडे, मुख्य सार्वजनिक संपर्क अधिकारी, दपरे