
Mann Ki Baat: मन की बात को लेकर सुझाव और शिकायतें मांगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के लिए इस बार भी केंद्र सरकार के माई गवर्मेंट द्वारा लोगों से मन की बात को लेकर उनके सुझाव और शिकायतें मांगी है। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने भारी संख्या में जन की बात रखकर अपनी शिकायतें-सुझाव पेश किए हैं। माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू एप पर तमाम यूजर्स ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार पेश किए हैं। केंद्र सरकार के माई गवर्मेंट हिंदी ने सोशल मीडिया मंच कू एप पर अपने आधिकारिक हैंडल ञ्चमाईजीओवीहिन्दी के जरिये बीते आठ फरवरी को एक पोस्ट की थी। इस पोस्ट में लिखा था: मन में है देशहित से जुड़ा कोई सुझाव या उन्नत विचार, 27 फरवरी के प्तमन की बात एपिसोड के लिए साझा करें पीएम नरेंद्र मोदी के साथ। इस पोस्ट के बाद देश भर के यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दी। कान्ति नामक एक यूजर ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'कापुर देहात रासुलाबाद मे लाहरापुर रोड पर एक सरकारी अस्पताल था, जिसमें पुरे गांव के लोग इलाज के लिए जाते थे परन्तु वह अस्पताल कई सालों से बंद पड़ा है कृपया उसे पुन: चालू करने की कृपा करें, क्योंकि जच्चा-बच्चा के इलाज और बड़े ऑपरेशन के लिए पूरे गांव में कोई अस्पताल नहीं है, जिसके कारण कई गभर्वती महिलाएं अपनी जान गंवा चुकी है कृपया करके उस पुराने अस्पताल को चालू करने की कृपा करें।
वहीं, शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक यूजर ने कू एप पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'दोस्तों देश में सबसे पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून जल्द से जल्द लागू होना चाहिए और शिक्षा के क्षेत्रों में प्रत्येक क्लास रूमों मे कैमरे लगने चाहिए और मोबाइल फोन स्कूल के अन्दर मना होना चाहिए। चाहे छात्र हो या शिक्षक तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के द्वारा भेजे गए विकास कार्यों के पैसे की सही जानकारी, क्योंकि आवास के लिए आ रहे पैसों में आज भी ग्राम प्रधानों के जरिये रिस्वत का खेल चल रहा है।
प्रोफेसर और लेखक चन्दन दूबे नाम के एक यूजर ने कू एप पर मन की बात कार्यक्रम के लिए सुझाव देते हुए लिखा, 'आदरनीय मोदी, मेरा सुझाव हैं की पुलिस विभाग को समवर्ती सूची में शामिल किया जाए, आज समय की मांग हैं की पुलिस को कुछ और अधिकार दिया जाए, वर्तमान अधिकार से पुलिस को कार्य करने में असुविधा हो रही हैं, साइबर अपराध को रोकने के लिए भी यह आवश्यक हैं की पुलिस समवर्ती सूची में शामिल हो,
सदानंद पीडी बर्नवाल नामक एक यूजर ने कू एप पर लिखा, पीएसीएल मामले को भी मन की बात में शामिल करने की कृपा करें, सेबी के द्वारा छ: वर्षों से लगातार निवेशकों को ठगा महसूस कर रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर छ: महीने में भुगतान करने का आदेश दिया था, जिसे छ: साल बीत जाने पर भी पांच करोड़ पचासी लाख निवेशकों से मात्र दस लाख लोगों को भुगतान किया गया। अत: प्रधान सेवक महोदय कृपया संज्ञान में लेते हुए गरीबों को मदद करें।Ó
Published on:
23 Feb 2022 09:03 pm
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